बोले हजारीबाग : सफाई, सुरक्षा और पानी लीकेज की समस्या से वार्डवासी परेशान
वार्ड 13 हजारीबाग एक शांत और कम आबादी वाला इलाका है, जहां सफाई की अनियमितता, नालियों का भरा रहना और पानी की पाइपलाइन में लीकेज जैसी समस्याएं हैं। स्थानीय लोग कचरा फेंकने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं क्योंकि डस्टबिन की कमी है। इसके चलते आवारा कुत्तों का आतंक भी बढ़ गया है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग चिंतित हैं।
वार्ड 13 हजारीबाग का शांत और कम आबादी वाला इलाका है, जहां सरकारी क्वार्टर, अपार्टमेंट, हॉस्टल और शैक्षणिक संस्थान बड़ी संख्या में मौजूद हैं। लेकिन इसी व्यवस्थित दिखने वाले वार्ड में कई मूलभूत समस्याएं लोगों को परेशान कर रही हैं। हिन्दुस्तान के बोले हजारीबाग कार्यक्रम के दौरान लोगों ने समस्याएं साझा करते हुए कहा कि सफाईकर्मियों की अनियमितता से गलियों में कचरा जमा रहता है, कई जगह नालियां भरी पड़ी हैं। पानी सप्लाई की पाइपलाइन के लीकेज से पानी बर्बाद होता है। हजारीबाग। वार्ड 13 हजारीबाग का बेहद शांत और कम जनसंख्या घनत्व वाला वार्ड है। इस वार्ड के एक बड़े हिस्से में सरकारी कर्मियों के आवास एवं लॉन बने हुए हैं।

ईसाई कब्रिस्तान और खेल का मैदान इस वार्ड के भौगोलिक विस्तार का ठीक-ठाक हिस्सा कवर करता है। नर्सिंग होम, अस्पताल और प्राइवेट एवं सरकारी विद्यालय होने के कारण आवासीय क्षेत्र घट जाता है। बस स्टैंड के समीप होने तथा पटना रांची रोड से पहुंच होने के कारण इस वार्ड में अनेक अपार्टमेंट हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ सरकारी कर्मचारी तथा हाल में बने अपार्टमेंट में भी बहुत सारे परिवार रहते हैं। संत कोलंबा कॉलेज के समीप होने के कारण इस वार्ड में गर्ल्स हॉस्टल भी काफी संख्या में हैं। इस वार्ड की दक्षिणी सीमा का निर्धारण कारगिल पेट्रोल पंप चौक से लेकर बड़कागांव रोड वाली सड़क से होता है, जबकि उत्तर एवं पूर्व में पटना रांची रोड इसकी सीमा बनाते हैं। पश्चिम में हजारीबाग बस स्टैंड से बड़कागांव केरेडारी वाली रोड इसकी सीमा निर्धारित करती है। हजारीबाग की शीतलता का अनुभव इस वार्ड में गर्मी के दिनों में घूमने पर भी हो जाता है। अभी भी फॉरेस्ट कॉलोनी वाला रोड पेड़ों से दोनों ओर अच्छादित है। जज एवं मजिस्ट्रेट कॉलोनी, फॉरेस्ट कॉलोनी ये सरकारी कर्मियों के निवास स्थल हैं। इधर साफ-सफाई कुछ अलग है। जिन इलाकों में अपार्टमेंट अधिक हैं, वहां रोड और गलियां साफ ही हैं। परंतु मुख्य रोड से अंदर की ओर जो गलियां जाती हैं, उनमें कई जगह कूड़े नजर आते हैं। जहां भी कोई खाली प्लॉट या बड़ा मैदान दिखता है, उसके दोनों किनारों पर कचरे का ढेर नजर आता है। वह जगह साफ-सुथरी कॉलोनी में दाग की तरह दिखती है। कई जगह नालियां पानी से भरी हुई थीं। नालियों की सफाई नहीं होने के कारण ऐसा हो रहा है। स्थानीय लोगों से बात करने पर पता चला कि सफाई कर्मी नियमित रूप से नहीं आते। जब मन करता है सफाई करते हैं, जब मन नहीं करता तो नहीं आते। एक-दो जगह सप्लाई पानी का पाइप टूटा हुआ नजर आता है। समीप के घर वाले बताते हैं कि जब पानी सप्लाई होता है, उस समय तेज फव्वारा निकलता है। बोरा बांधकर तथा प्लास्टिक लगाकर किसी तरह पानी के प्रवाह को रोक रखा है। इस बारे में कई बार नगर निगम के कर्मियों से शिकायत भी की जा चुकी है कि सप्लाई पानी का लीकेज हो रहा है, यहां पाइप की मरम्मत कर दी जाए। परंतु अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। हुड़हुरू चौक से लेकर पश्चिम में विवेकानंद स्कूल तक रोड पर प्लास्टिक, सूखे पत्ते एवं अन्य कचरा नजर आते हैं। जगह-जगह छोटी डस्टबिन की व्यवस्था की जानी चाहिए। छोटी डस्टबिन नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानी होती है। लोग अपने घरों से बहुत दूर कचरा फेंकने नहीं जाना चाहते, इसलिए जहां भी खाली जमीन दिखती है, वहां कचरा डाल देते हैं। सड़क किनारे गंदगी का अंबार हजारीबाग का यह वार्ड शांत और कम आबादी वाला वार्ड माना जाता है। यहां बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मियों के आवास, लॉन और खुले मैदान हैं। ईसाई कब्रिस्तान, खेल का मैदान, अस्पताल और स्कूल होने से आवासीय इलाका थोड़ा सीमित हो जाता है। बस स्टैंड के पास होने और पटना रांची रोड से अच्छी पहुंच होने के कारण कई अपार्टमेंट बने हैं। संत कोलंबा कॉलेज के पास कई गर्ल्स हॉस्टल भी हैं। इलाका शांत है लेकिन लोगों की सुविधाएं हर जगह एक जैसी नहीं दिखतीं। कुछ जगह साफ-सफाई ठीक है, तो कुछ इलाकों में गंदगी की समस्या भी दिखती है। शाम ढलते ही पसर जाता है अंधेरा कचरा वाले ऐसे स्थान पर आवारा कुत्तों के अड्डे बन जाते हैं। आवारा कुत्ते छोटे बच्चों को कई बार काट चुके हैं। इसलिए यदि कचरा नहीं हटता है तो मां-बाप बच्चों को कॉलोनी में पैदल जाने से मना करते हैं। कचरा वाली जगह पर हमेशा कुत्ते दिखते हैं और बड़े बुजुर्गों पर भी हमला करने की कोशिश कर चुके हैं। कई जगह स्ट्रीट लाइट खराब है। इसके कारण चैन स्नैचर वृद्ध महिलाओं एवं अन्य लोगों का चेन छीन चुके हैं। यह मोहल्ला वैसे भी बहुत शांत है क्योंकि ज्यादातर लोग अपार्टमेंट या अपने सरकारी क्वार्टर में रहते हैं। इसलिए स्ट्रीट लाइट एवं सीसीटीवी की व्यवस्था करना बहुत जरूरी है। नियमित सफाई की व्यवस्था हो इस वार्ड में सफाई व्यवस्था ठीक से नहीं चल रही है। मुख्य रोड काफी हद तक साफ दिखाई देते हैं, लेकिन अंदर की गलियों में जगह-जगह कचरा फैला मिलता है। खाली प्लॉट और बड़े मैदान के किनारे कचरे के ढेर जमा हो जाते हैं, जो पूरी कॉलोनी की सुंदरता खराब करते हैं। कुछ नालियां पानी से भरी रहती हैं क्योंकि उनकी नियमित सफाई नहीं होती। स्थानीय लोग बताते हैं कि सफाई कर्मी रोज नहीं आते। कभी आता हैं, कभी नहीं। इस अनियमितता के कारण कचरा हट नहीं पाता और जगह गंदी बनी रहती है। कई इलाकों में बदबू की समस्या भी लोगों को परेशान करती है। कुत्तों के आतंक से वार्ड के लोग हैं परेशान हुड़हुरू चौक से विवेकानंद स्कूल तक सड़क पर प्लास्टिक, सूखे पत्ते और अन्य कचरा बिखरा रहता है। छोटी डस्टबिन नहीं होने के कारण लोग कचरा दूर फेंकने नहीं जाना चाहते और खाली जमीन पर ही डाल देते हैं। ऐसे स्थानों पर आवारा कुत्ते जमा हो जाते हैं, जो कई बार छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर चुके हैं। आवारा कुत्ते छोटे बच्चों को कई बार काट चुके हैं। इससे लोग गली-मोहल्ले में पैदल चलने से डरते हैं। वहीं कई स्ट्रीट लाइट खराब होने से रात में अंधेरा रहता है, जिसका फायदा उठाकर चैन स्नैचर वारदातें कर चुके हैं। इसलिए कचरा हटाने, डस्टबिन लगाने व सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। लीकेज से बढ़ी परेशानी सप्लाई पानी की पाइपलाइन कई जगह टूटी हुई है। जब पानी सप्लाई होता है तो पाइप के टूटे हिस्से से तेज फव्वारा निकलता है। लोग बोरा और प्लास्टिक बांधकर पानी के बहाव को रोकने की कोशिश करते हैं। कई बार शिकायत की है कि पानी लगातार लीकेज हो रहा है और पाइप को ठीक कराया जाए। लेकिन अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ है। पानी की बर्बादी भी होती है। सप्लाई पानी की पाइपलाइन टूटी हुई है। पानी आने पर तेज फव्वारा निकलता है और काफी पानी बर्बाद होता है। कई बार शिकायत की है। -मो फिरोज मुख्य सड़क तो साफ रहती है, लेकिन अंदर की गलियों में कचरा जमा रहता है। खाली प्लॉट के पास सबसे ज्यादा गंदगी दिखती है। -विजय प्रसाद सफाई कर्मी नियमित नहीं आते। जब दो तीन दिन सफाई नहीं होती तो गली-कूचा गंदा हो जाता है और बदबू भी फैलती है। -इनाम खान हमारे वार्ड में अपार्टमेंट और सरकारी क्वार्टर दोनों ही ज्यादा हैं। लोग अपने काम में व्यस्त रहते हैं, इसलिए गलियों में भीड़ कम दिखाई देती है। -मोनू कुमार स्ट्रीट लाइट खराब होने से रात में इस इलाके में बहुत अंधेरा हो जाता है। लोग डरकर बाहर निकलते हैं। कुछ जगह चैन स्नैचिंग भी हुई है। -किरण देवी कचरा जमा होने से आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ गई है। बच्चे गली में खेलने भी डरते हैं। बच्चों को कुत्ते काटने की कोशिश कर चुके हैं। -उमेश प्रजापति डस्टबिन नहीं होने से कचरा फेंकने में दिक्कत होती है। गली में डस्टबिन लगाई जाए तो लोग कचरा सड़क या खाली जमीन पर नहीं डालेंगे। -नारायण साव फॉरेस्ट कॉलोनी वाली सड़क अब भी पेड़ों से ढकी है, जिससे गर्मी में भी ठंडक रहती है। कुछ जगह सड़क किनारे कचरा डाल दिया जाता है। -शुक्रा महतो नालियों की सफाई समय पर नहीं होती। कई जगह नालियां भरी रहती हैं। बारिश में पानी बाहर सड़क पर फैल जाता है। -बालकिशन महतो बस स्टैंड और मुख्य सड़क पास होने से वार्ड की लोकेशन अच्छी है, लेकिन उसके हिसाब से सफाई और व्यवस्था नहीं है। -बंशी प्रसाद गर्ल्स हॉस्टल और अपार्टमेंट ज्यादा होने से सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। छात्राएं शाम में सड़क पर चलने में असुरक्षित महसूस करती हैं। -रेहवाज साव कर्मचारी कई बार शिकायत लेने आते हैं, पर समस्याओं का समाधान नहीं होता। समस्याएं महीनों तक यूं ही पड़ी रहती हैं। -तिलक साव वार्ड के लोगों के लिए हर वक्त उपलब्ध रहता हूं। जब भी किसी समस्या के समाधान के लिए लोग मिलने आते हैं तत्काल उसके निदान करने का कोशिश करता हूं। भविष्य में भी वार्ड-13 के बेहतरी के लिए व्यक्तिगत स्तर पर कार्य करता रहूंगा। और जो भी समस्या है उसे विभाग से बात कर जल्द समाधान करने की कोशिश करूंगा। -विकास यादव, वार्ड पार्षद-13 हर वार्ड की तरह वार्ड 13 के लिए भी नगर निगम तरफ से सहयोग किया जाता है। लोगों ने जिन समस्याओं के लिए अपने विचार व्यक्त किए हैं उनके समाधान के लिए शीघ्र प्रयास किया जाएगा। यह वार्ड पहले से हीं साफ सुथरा है इसे और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए ठोस कदम उठाया जाएगा। -आनंद देव, पूर्व उपमहापौर, हजारीबाग

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