सुबह की चाय-ब्रेड से लेकर रात के भोजन तक हुआ महंगा
प्लान की खबर हजारीबाग, हमारे प्रतिनिधि। वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध तनाव और आपूर्ति

प्लान की खबर हजारीबाग, हमारे प्रतिनिधि। वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध तनाव और आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं का असर अब हजारीबाग के आम लोगों की रसोई तक साफ दिखाई देने लगा है। शहर में सुबह की चाय-ब्रेड से लेकर रात के भोजन तक का खर्च बढ़ गया है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
खाद्य माल की कीमतों में वृद्धि
पिछले कुछ सप्ताह में दैनिक उपयोग की कई वस्तुओं के दाम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ब्रेड के विभिन्न पैकेटों की कीमतों में 2 से 5 रुपये तक की वृद्धि हुई है। शहर के कई उपभोक्ताओं का कहना है कि जिस ब्रेड का पैकेट कुछ समय पहले 30 रुपये में मिलता था, वह अब 35 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह चायपत्ती, बिस्किट और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतें बढ़ने से घरेलू बजट का संतुलन बिगड़ गया है।
खाद्य वस्तुओं पर असर
दूध और खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। हजारीबाग के बाजारों में दूध की कीमतों में प्रति लीटर 2 से 3 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं सरसों तेल, जो कुछ समय पहले 140 से 150 रुपये प्रति लीटर के बीच बिक रहा था, अब 170 से 180 रुपये प्रति लीटर या उससे अधिक कीमत पर मिल रहा है। ब्रांडेड रिफाइंड तेल और घी की कीमतों में भी पिछले एक महीने के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।
खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दाम
महंगाई की मार केवल तेल, दूध या ब्रेड तक सीमित नहीं है। दाल, आटा, मसाले और अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दामों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। गृहिणियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बजट संभालना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है। बचत करना तो दूर, अब जरूरी खर्चों में भी कटौती करनी पड़ रही है। मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि आय में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में परिवारों को अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करना पड़ रहा है।
आतंत्रिक और बाह्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता में कमी, बढ़ती परिवहन लागत और वैश्विक अस्थिरता के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसका असर स्थानीय बाजारों में भी देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियों में जल्द सुधार नहीं हुआ तो निकट भविष्य में महंगाई से राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में हजारीबाग सहित पूरे क्षेत्र के आम उपभोक्ताओं के लिए रसोई का बजट संतुलित रखना बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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