Ramlila staging Ramayana campaign in Sirsi village - सिरसी में रामलीला में उमड़ रही भीड़ DA Image
12 दिसंबर, 2019|8:58|IST

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सिरसी में रामलीला में उमड़ रही भीड़

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चार दशक पहले तक जिले के हर इलाके में रामलीला का मंचन होता था। वर्षों की यह परंपरा टीवी और आधुनिक जीवन शैली से लुप्त होती जा रही है। वाबजूद रामलीला जैसे विलुप्त होती सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रखने का प्रयास भी चल रहा है। शहर से सटे कटकमदाग प्रखंड के सिरसी गांव में रामायण प्रचार मंडल विंध्याचल प्रयागराज की टीम इस सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रखने का प्रयास कर रही है। रामलीला देखने महिला पुरुष दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है।दूर-दूर से लोग इसे समझने और देखने आ रहे हैं। बुधवार को आठवें दिन रामलीला हुई। इसमें लंका कांड का दृश्य दिखाया गया। यह रामलीला 11 दिनों तक जारी रहेगी।---कलाकारों को सम्मान नहीं मिलने से रामलीला की भावना को पहुंचती है ठेसरामायण प्रचार मंडल के संचालक राजेंद्र धर दुबे कहते हैं कि भक्ति में प्रथम सत्संग और भगवत नाम के चर्चा की होती है। भक्ति की इस परंपरा को बढ़ाने का काम हमारी टीम कर रही हैं। गांव अब शहरीकरण के रंग मे रंगने लगे हैं। इससे कलाकारों को भोड़े प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ा है। कलाकारों को मान सम्मान नहीं मिलने से उनके आत्मसम्मान और रामलीला की भावना को ठेस पहुंचती है। रामायण प्रेरक प्रसंगों से निकलता है मर्यादित आचरण का अपनाने का संदेशकलाकार रामसखा व्यास ने कहा कि पहले प्रेम, भाईचारा, सद्भाव, संस्कृति एवं सहिष्णुता को बढ़ावा देने राम की लीलाओं का मंचन होता था। दशहरा रामनवमी के समय दो-दो माह तक गांव मे लोग रामलीला के मंचन का अभ्यास किया करते थे। इससे न केवल ग्रामीणों में आपस में प्रेम बढ़ता था।बल्कि रामायण के प्रेरक प्रसंगों से मर्यादित आचरण अपनाने का संदेश भी निकलता था।पी 13 राम सखा व्यास जीरामलीला मंथन की परंपरा विलुप्त होने से गांवों में बढ़ रहे हैं अपराधकलाकार रवि नाथ शांडिल्य कहते हैं कि जब तक गांव में रामलीला मंचन की परंपरा रही गांव में शाम की थी अपराध का नामोनिशान तक नहीं था लोग रामकथा को सुनकर पाप से डरते थे पुणे वा अच्छा कार्य करने के लिए आगे बढ़ते थे यह परंपरा विलुप्त होने से गांव में अपराधों का ग्राफ बढ़ गया है।पी14 रविनाथ शांडिल्यमाला उठाने से करना पड़ता है भोजन प्रबंध कलाकारों ने बताया कि रामलीला मंचन के दौरान भोजन प्रबंध करने के लिए माला उठाने के लिए लोगों से अपील करनी पड़ती है। जो श्रद्धालु माला उठाते हैं। उन्हें कलाकारों के भोजन व अन्य खर्चों के लिए प्रतिदिन 3100 रूपये का भुगतान करना पड़ता है।जिसमें कथावाचक वाद्य यंत्र बजाने वाले कलाकार का पारिश्रमिक भी शामिल है। मंच दर्शकों के बैठने के लिए पंडाल जनरेटर बाजा बत्ती का इंतजाम ग्रामीणों को करना पड़ता है।कलाकारों ने बताया कि इसके पहले कटकमसांडी के लुपुंग गांव में रामलीला का मंचन हुआ था। रामलीला का मंचन नौ दिनों तक होता है। सिरसी के दर्शकों के आग्रह पर 11 दिनों तक रामलीला की प्रस्तुति की जाएगी।

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