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प्रेमचंद के साहित्य समाज बदलने की सबसे बड़ा हथियार है: सीटू

प्रेमचंद के 142वें जयंती के अवसर पर सीपीआई और सीपीएम ने एक विचार गोष्ठी कर्मवीर भवन में किया। जिसकी अध्यक्षता सीपीआई के सहायक जिला मंत्री महेंद्र...

प्रेमचंद के साहित्य समाज बदलने की सबसे बड़ा हथियार है: सीटू
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,हजारीबागMon, 01 Aug 2022 02:00 AM
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हजारीबाग। नगर प्रतिनिधि

प्रेमचंद के 142वें जयंती के अवसर पर सीपीआई और सीपीएम ने एक विचार गोष्ठी कर्मवीर भवन में किया। जिसकी अध्यक्षता सीपीआई के सहायक जिला मंत्री महेंद्र राम ने की। इस अवसर पर प्रेमचंद के तस्वीर पर सामूहिक रूप से माल्यार्पण करने के बाद सीपीएम नेता गणेश कुमार सीटू ने विषय प्रवेश करवाते हुए कहा कि प्रेमचंद हिंदी के युग प्रवर्तक रचनाकार थे। उनकी रचनाओं में तत्कालीन और वर्तमान इतिहास बोलता है। वे पहले उपन्यासकार थे जिन्होंने उपन्यास साहित्य को तिलस्मी और ऐयारी से बाहर निकाल कर उसे वास्तविक भूमि पर ला खड़ा किया। उन्होंने अपनी रचनाओं में जन साधारण की भावनाओं, परिस्थितियों और उनकी समस्याओं का मार्मिक चित्रण करने के साथ-साथ उसके खिलाफ संगठित संघर्ष करने की प्रेरणा भी देती है। वर्तमान समय में देश की जो हालात है उससे लड़ने के लिए प्रेमचंद के साहित्य से अच्छा हथियार और कोई दूसरा हो ही नहीं सकता है। प्रेमचंद की रचनाओं को देश में ही नहीं विदेशों में भी आदर प्राप्त हैं। प्रेमचंद और उनकी साहित्य का अंतर्राष्ट्रीय महत्व है। आज उन पर और उनके साहित्य पर विश्व के उस विशाल जन समूह को गर्व है जो साम्राज्यवाद, पूंजीवाद सामंतवाद और संप्रदायवाद के विरूद्ध चल रहे संघर्ष में शामिल हैं। प्रेमचंद ने देश को आजादी मिलने के पहले ही आगाह किया था पर अफसोस की बात है कि आजादी मिलने के बाद हम लोगों ने उस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और आज हम सब के सब परेशान हैं। विचार गोष्ठी में सीपी आई के नेता प्रवील प्रसाद मेहता, मजीद अंसारी, चॉद खान, नेजाम अंसारी, नन्दलाल साव, दयानन्द कुमार, नरेश प्रसाद, सीपीआईएम के जिला सचिव ईश्वर महतो, विजय मिश्रा, तपेश्वर राम,लक्ष्मी नारायण सिंह, भुवनेश्वर महतो, किरण देवी, किशोरी माहतो, सूरेश दास सहित कई लोगों ने ने विचार रखे।

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