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मिचौंग चक्रवाती तूफान ने किसानो की उम्मीद पर फेरा पानी

धनरोपनी के समय पानी नहीं धनकटनी के समय पानी की भरमार, दो लाख से अधिक किसानों के धान पड़े हैं खेत...

मिचौंग चक्रवाती तूफान ने किसानो की उम्मीद पर फेरा पानी
हिन्दुस्तान टीम,हजारीबागFri, 08 Dec 2023 12:30 AM
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हजारीबाग हमारे प्रतिनिधि
धनरोपनी के समय पानी नहीं धनकटनी के समय पानी की भरमार से किसान परेशान हैं। जिले में दो लाख से अधिक किसानों के धान की खड़ी फसल खेतों में पड़ी हैं। लेकिन मिचौंग चक्रवात ने दो लाख से अधिक किसानों की उम्मीद पर पानी फेर दिया है।‌ जिले में धान उत्पादन का लक्ष्य 84 हजार हेक्टेयर में था। लेकिन बारिश नहीं होने के कारण आधे से अधिक बिचड़े सूख गए। जैसे तैसे किसानों ने पटवन की व्यवस्था कर मात्र 35,449 हेक्टेयर में धान की रोपाई की। निर्धारित लक्ष्य के 40 प्रतिशत धान का आच्छादन किया गया।

जिले में 3:30 लाख से अधिक छोटे एवं मध्यम दर्जे के सीमान्त किसान हैं। जिसमें लगभग दो लाख 25000 किसान प्रधानमंत्री फसल राहत योजना के तहत लाभ लेने के लिए अपना नाम रजिस्टर्ड कराया है। कृषि विभाग के ही आंकड़े पर गौर करें तो एक लाख से अधिक किसान इस बार धान की रोपाई नहीं कर पाए। लगभग दो लाख किसानों ने धान की खेती की। इसमें से आधे से अधिक किसानों के खेतों में धान की पकी फसल खड़े हैं। जबकि आधे से अधिक की कटाई हो चुकी है। जो खलिहान में ही पड़े हैं। पिछले दो दिनों की बारिश से ऐसे किसानों की धकधकी बढ़ गई है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वह मौसम की मार से कैसे निकले। नवादा के किसान जूगू राणा ने बताया कि पानी की कमी के कारण धान के बिचड़े आधे खेतों में ही सूख गए। थोड़ा बहुत पटवन कर जो बचाया। वहीं फसल अब पक कर तैयार है। लेकिन बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। साल भर क्या कहेंगे यह चिंता उन्हें सताए जा रही है।

रबी फसल को होगा फायदा बोआई में आएगी तेजी

जिला कृषि पदाधिकारी असीम रंजन एक्का के अनुसार चक्रवाती तूफान की वजह से हो रही बारिश से रवि फसल को फायदा होगा। रबी फसल के बोआई में तेजी आएगी। क्योंकि अभी भी जिले में रबी फसल के बोआई की स्थिति काफी दयनीय है।जिले में गेहूं आच्छादन का लक्ष्य 15000 हेक्टेयर था। जिसमें मात्र 1784 हेक्टेयर में गेहूं की बोआई हो पाई है। जो निर्धारित लक्ष्य का 11.9 प्रतिशत है। इसी तरह 500 हेक्टेयर में मक्का लगाने का लक्ष्य निर्धारित है। जिसमें मात्रा 20.9 हेक्टेयर में मक्का लग पाया है जो निर्धारित लक्ष्य का मात्र चार फीसदी है। इसी तरह 1700 हेक्टेयर में चना लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसमें 1895 हेक्टेयर में चना की बोआई हो पाई है। जो लक्ष्य का 11.01प्रतिशत है। इसी तरह 2500 हेक्टेयर में मसूर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जिसमें 137 एकड़ में हेक्टेयर में मसूर लग पाया है। जो निर्धारित लक्ष्य का 5.5 प्रतिशत है

इसी तरह 2500 हेक्टेयर में मटर लगाने का निर्धारण किया गया था। लेकिन मात्र 33 हेक्टेयर में मटर की खेती हो पाई है। जो निर्धारित लक्ष्य का 13.3 प्रतिशत है। जबकि 1000 हेक्टेयर में अन्य दलहन फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसमें मात्र 265 हेक्टेयर में अन्य दलहन फसल लग पाई है। जो निर्धारित लक्ष्य का 2.7 प्रतिशत है। इसी तरह 1600 हेक्टेयर में राई सरसों और तोरी लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसमें 2995 हेक्टेयर में राई सरसों और तोरी का आच्छादन हो पाया है। जबकि 3000 हेक्टेयर में तीसी लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें 80.7 हेक्टेयर में तिसी लग पाया है।वही 500 हेक्टेयर में कुसुम लगाने का लक्ष्य निर्धारित था। जिसके आच्छादन की उपलब्धि शून्य है।

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