
पंकरी बरवाडीह में बनेगा मेगालिथ पार्क, तीन करोड़ का आवंटित, निदेशक ने किया दौरा
बड़कागांव, हजारीबाग में विश्व प्रसिद्ध मेगालिथ स्थल पर मेगालिथ पार्क निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए 3 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। पार्क से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साइट की सुरक्षा के लिए 1 करोड़ 99 लाख रुपये की लागत से चहारदीवारी निर्माण प्रस्तावित है।
हजारीबाग/बड़कागांव हिटी जिले के बड़कागांव प्रखंड अंतर्गत पंकरी बरवाडीह गांव में स्थित विश्व प्रसिद्ध मेगालिथ स्थल को पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यहां मेगालिथ पार्क निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है, जिसके लिए सीएसआर मद से तीन करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। पर्यटन, कला, संस्कृति, खेल एवं युवा कार्य विभाग के निदेशक आशिफ एकराम ने सोमवार को स्थल का निरीक्षण कर जिला योजना पदाधिकारी डीपीओ पंकज तिवारी से अब तक की गई तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि लगभग 1600 वर्ग मीटर क्षेत्र में मेगालिथ पार्क विकसित किया जाएगा।
इसके तहत स्थल की सुरक्षा, संरक्षण और पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चहारदीवारी और संरक्षण से सुरक्षित होगा ऐतिहासिक धरोहर मेगालिथ स्थल की सुरक्षा के लिए करीब 1 करोड़ 99 लाख रुपये की लागत से चहारदीवारी निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे सदियों पुरानी यह ऐतिहासिक धरोहर अतिक्रमण और क्षति से सुरक्षित रह सकेगी। रोजगार और पर्यटन की नई संभावनाएं मेगालिथ पार्क बनने से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे बड़कागांव क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। गाइड, सुरक्षा कर्मी, साफ-सफाई, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। रैयतों की सहमति से होगा विकास अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पार्क निर्माण की प्रक्रिया रैयतों और ग्रामीणों की सहमति से, विधिसम्मत तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी। भूमि सीमांकन, मुआवजा और रोजगार से जुड़े विषयों पर विभागीय स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। खनन से मुक्त होगा ऐतिहासिक क्षेत्र ग्रामीणों ने बताया कि यह इलाका एनटीपीसी के खनन क्षेत्र में आता है, जहां सेक्शन-9 लागू है। इस पर निदेशक ने कहा कि जियोलॉजिकल सर्वे के बाद रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर मेगालिथ पार्क क्षेत्र को खनन गतिविधियों से मुक्त कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। आसपास के ऐतिहासिक स्थलों को भी मिलेगा लाभ निरीक्षण के दौरान पास स्थित पचपंडवा बौद्ध स्तूप का भी अवलोकन किया गया। अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में मेगालिथ पार्क और बौद्ध स्थल को जोड़कर हेरिटेज टूरिज्म सर्किट विकसित किया जा सकता है, जिससे इस पूरे इलाके की पहचान बदलेगी। इस पर स्थानीय भू -रैयतों का कहना है कि बिना मुआवजा दिए ही मुखिया व सीओ के पहल पर हमलोग भू-रैयत व ग्रामीण स्वंय से अस्थायी रुप से ऐतिहासिक मेगालिथ स्थल के चारों ओर बिखरे पत्थरों को संरक्षित करने के उद्देश्य से तार घेराव कर एक मिसाल पेश किया हैं। मौके पर पर्यटन कला, संस्कृति,खेल एवं युवा कार्य विभाग के निदेशक आरिफ एकराम, वहीं विभाग के अधिकारी,भारत सरकार पुरात्तव विभाग रांची की टीम, डीपीओ पंकज कुमार तिवारी, कार्यपालक अभियंता ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल अमरेन्द्र कुमार, अंचलाधिकारी मनोज कुमार, थाना प्रभारी कृष्णा कुमार गुप्ता,सहायक अभियंता लव कुमार,कनीय अभियंता धनंजय कुमार,अमीन नरेंद्र कुमार, कर्मचारी मनीष पाठक, जितेन्द्र दास,मुखिया प्रतिनिधि राजकुमार साव के अलावा रैयत रुपलाल साव, कोल्हा साव, महावीर साव, गेंदों साव, सरयू साव, कृष्णा कुमार साव व सुनील कुमार,सचिन कुमार, दीपू साव, राजु साव, कोमलचंद साव, विजय कुमार, निर्मल साव, भुनेश्वर साव, शिवनारायण साहु,नरेश कुमार साव सहित दर्जनों ग्रामीण महिला पुरुष शामिल थे। उम्मीदें बड़कागांव पर्यटन नक्शे पर आएगा स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे ऐतिहासिक धरोहर का स्थायी संरक्षण हो सकेगा खनन से प्रभावित क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा

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