
कटकमसांडी में 14 लोगों को ही मिली सौ दिनों की मजदूरी
मनरेगा योजना में कटकमसांडी प्रखंड के 9267 पंजीकृत मजदूरों में से केवल 14 को 100 दिनों का काम मिला है। यहां 0.52 प्रतिशत की सफलता दर है, जिससे मजदूर दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम नहीं हो रहा है।
मनरेगा योजना में कटकमसांडी प्रखंड में 0.52 प्रतिशत मजदूरों को ही मिल पा रहा है सौ दिन काम कटकमसांडी प्रखंड में पंजीकृत मजदूरों की संख्या 9267 है जबकि एक्टिव मजदूर 2698 है कटकमसांडी, प्रतिनिधि । मनरेगा योजना में मजदूरों को सौ दिन काम उपलब्ध कराने में कटकमसांडी प्रखंड लक्ष्य से काफी पीछे है। यहां एक्टिव 2698 मनरेगा मजदूरों में सिर्फ 14 को 100 दिनों का काम मिला है। इसमें अनुसूचित जनजाति के तीन, अनुसूचित जाति के एक और अन्य 10 मजदूरों को इसका लाभ मिला है। इसमें सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। इतना ही नहीं कटकमसांडी प्रखंड में बिरसा सिंचाई कूप संवर्धन योजना में लक्ष्य के विरुद्ध प्रगति काफी चिंताजनक है।
यही कारण है कि मजदूरों को सौ दिन रोजगार उपलब्ध कराने में प्रखंड 0.52 प्रतिशत ही सफलता हासिल की है। मजदूरों नहीं मिलने से रोजगार की तलाश में मजदूर दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं। मालूम हो कि कटकमसांडी में मनरेगा में पंजीकृत मजदूरों की संख्या 9267 है । इसमें एक्टिव मजदूरों की संख्या 2698 है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी के इस योजना के प्रति उदासीनता और मनरेगा के प्रखंड स्तर के अधिकारी की लापरवाही के कारण गांव में काम नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा योजना का काम मजदूरों से नहीं कर मशीन से किया जाता है। प्रखंड के आराभुसाई, ढौठवा पंचायत में कुएं का निर्माण मजदूर नहीं बल्कि मशीन से कराया गया था। इसके बाद रोजगार सेवक ने भुगतान पर भी रोक भी लगाया था। कोट : प्रखंड में पंजीकृत मजदूरों की संख्या 9267 है । जिसमें करीब 22 प्रतिशत मजदूरों को काम मिल रहा है । गोपाल प्रसाद, मनरेगा बीपीओ कटकमसांडी।

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