बुकिंग के 15 दिन बाद भी नहीं मिल रहा है लोगों को गैस सिलिंडर
हजारीबाग में एलपीजी गैस की किल्लत बढ़ रही है, जिससे 4 लाख से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 64,655 बीपीएल परिवारों को कनेक्शन मिला है। ईरान-इजराइल युद्ध के चलते सप्लाई चेन में बाधा आई है। इसके परिणामस्वरूप लोग इलेक्ट्रिक चूल्हों की ओर बढ़ रहे हैं, जो सस्ते और सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं।

हजारीबाग हमारे प्रतिनिधि जिले में एलपीजी गैस का संकट गहराता जा रहा है। जहां 4 लाख से अधिक परिवार सीधे तौर पर इससे प्रभावित हुए हैं। वही हजारीबाग जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत तक 64,655 से अधिक बीपीएल परिवारों परेशान हैं जिले में कुल 1,17,485 बीपीएल परिवारों को नि:शुल्क गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 64,655 से अधिक को कनेक्शन दिया जा चुका है, और शेष लाभार्थियों को कवरेज देने की प्रक्रिया जारी है। उज्ज्वला योजना 3.0 के अंतर्गत जिले में 5,360 नए गैस कनेक्शन का लक्ष्य रखा गया है। उज्ज्वला कनेक्शन के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में मिलती है।
इसमें मुफ्त कनेक्शन दिया जाता है। योजना के तहत बिना किसी जमा राशि के गैस कनेक्शन, रेगुलेटर, और सुरक्षा नली मिलती है। योजना के तहत अब लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर प्रति वर्ष 9 रिफिल तक सब्सिडी दी जा रही है। स्थिति के अनुसार उज्ज्वला योजना के अलावा लगभग 3:30 लाख उपभोक्ताओं को बुकिंग के 15 से 20 दिन बाद भी उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, और कुछ क्षेत्रों में तो प्रतीक्षा अवधि 35 दिन तक पहुँच गई है। इस संकट का मुख्य कारण मध्य पूर्व विशेषकर ईरान-इजरायल में चल रहा युद्ध और सप्लाई चेन में आई रुकावट बताया जा रहा है। इससे बैकलाक की समस्या बढ़ गई है। जिलों में हजारों सिलेंडरों का बैकलॉग जमा हो गया है। आपूर्ति कम होने के कारण एजेंसियां प्रतिदिन केवल सीमित संख्या में ही सिलेंडर डिलीवर कर पा रही हैं। कई गैस एजेंसियों ने होम डिलीवरी लगभग बंद कर दी है। लोगों को खुद एजेंसी या गोदामों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जहाँ घंटों लंबी कतारें लगी रहती हैं। जिला प्रशासन ने हाल ही में विभिन्न एजेंसियों और गोदामों का औचक निरीक्षण किया है। इस दौरान कई गैस एजेंसी मे नियमों के उल्लंघन जैसे स्टॉक बोर्ड न होना पर नाराजगी जताई गई और कई खाली सिलेंडर जब्त किए गए। प्रशासन की कार्केरवाई वाबजूद डीलरों की मनमानी और कालाबाजारी जारी है।चौपारण जैसे क्षेत्र में प्रशासन की सख्ती के बाद ही गैस वितरण शुरू हो सका। उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज आ जाता है, लेकिन वास्तव में सिलेंडर नहीं मिलता। कालाबाजार में सिलेंडर की कीमतें 2800 तक पहुँच गया है। इसका आम जनजीवन पर प्रभाव साफ पड़ता दिख रहा है। लोग विकल्प की तलाश कर रहे हैं। गैस न मिलने के कारण लोग फिर से लकड़ी और कोयले के चूल्हों का उपयोग करने को मजबूर हैं। विशेषकर मजदूर और छात्र कोचिंग हब जैसे कोर्रा-मटवारी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं, जिनमें से कई छात्र मेस बंद होने के कारण घर लौटने को मजबूर हो गए हैं। गैस की कमी से होटल और रेस्टोरेंट में खाने की कीमतों में 10 से 20 रुपए की वृद्धि हुई है। व्यावसायिक गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद होने से बरही औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों पर भी ताला लटकने की नौबत आ गई है।इलेक्ट्रिक चूल्हे के प्रति लोगों की बढ़ रही रुचिहजारीबाग हमारे प्रतिनिधिहजारीबाग में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिमी एशिया के संकट के कारण ईंधन की किल्लत के चलते, इलेक्ट्रिक चूल्हे खासकर इंडक्शन कुकटॉप का चलन तेजी से लौट रहा है। इलेक्ट्रिक चूल्हे के प्रति लोगों की रुचि फिर से बढ़ रही है। सरकार भी इस किल्लत से निपटने के लिए इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े बर्तनों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।इलेक्ट्रिक या इंडक्शन चूल्हे के वापस लोकप्रिय होने के पीछे एलपीजी से सस्ता और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। यह कम खर्चीला है। इंडक्शन कुकटॉप एलपीजी गैस स्टोव की तुलना में कहीं अधिक किफायती होते हैं।क्योंकि इनमें सिलेंडर भरवाने की झंझट या हर दो महीने में महंगा सिलेंडर लेने की आवश्यकता नहीं होती। इसमें सुरक्षा भी मिलती है। इंडक्शन चूल्हे में खुली आग नहीं होती, जिससे रसोई में तेल से आग लगने या उंगलियां जलने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा न के बराबर होता है। इसमे ऊर्जा दक्षता और तेज गति से खाना पकता है। इंडक्शन सीधे बर्तन को गर्म करता है, जिससे गैस की तुलना में खाना तेजी से पकता है। ये पारंपरिक इलेक्ट्रिक कॉइल स्टोव की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक और गैस स्टोव की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक ऊर्जा-कुशल होते हैं, क्योंकि इनमें गर्मी हवा में बर्बाद नहीं होती। इसके आधुनिक फीचर्स से लोगों को उपयोग में आसानी होती है।अब इनमें तापमान को सटीक रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। सतह ठंडी रहने के कारण इन्हें पोंछकर साफ करना बहुत आसान होता है। आधुनिक इंडक्शन चूल्हों में ऑटोमैटिक बंद होने, चाइल्ड लॉक और ओवरहीट सुरक्षा जैसे फीचर्स होते हैं।इंडक्शन बर्तन की मांग बढ़ीइंडक्शन पर केवल विशिष्ट चुंबकीय बर्तन जैसे- स्टेनलेस स्टील, कास्ट आयरन ही काम करते हैं। जिसकी मांग बढ़ गई है। इसके अत्यधिक उपयोग से बिजली का बिल बढ़ सकता है। इंडक्शन चूल्हा को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियां बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में कई घरों में 15 एंपियर का प्लग न होना या कम वोल्टेज की समस्या इसके इस्तेमाल में बाधक हैं।
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