
बड़कागांव में सरकारी आदेश की अनदेखी, ठंड में खुला रहा स्कूल
झारखंड में कड़ाके की ठंड और शीतलहरी के चलते सरकार ने सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों को 08 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया। हजारीबाग उपायुक्त ने 9 जनवरी तक कक्षाएं स्थगित करने का निर्देश दिया, लेकिन कई निजी स्कूलों ने इसे नजरअंदाज किया। इसके चलते बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
बड़कागांव, प्रतिनिधि इन दिनों झारखण्ड में पड़ रही कड़ाके की ठंड और जारी शीतलहरी के मद्देनजर बच्चों की सेहत और सुरक्षा की दृष्टि से सरकार ने सूबे के सभी सरकारी तथा गैर सरकारी स्कूलों को 08 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया था। जारी ठंड को देखते हुए हजारीबाग उपायुक्त ने भीषण ठंड व शीतलहरी के मद्देनज़र 9 जनवरी को कक्षा केजी से बारहवीं तक की कक्षाएं स्थगित करने का आदेश जारी किया गया। जिसमें कहा गया कि मौसम विज्ञान केन्द्र,रांची द्वारा जारी विशेष बुलेटिन में राज्य में भारी ठंड एवं शीतलहरी की चेतावनी दी गई है। उक्त चेतावनी के आलोक में आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत हजारीबाग जिला अंतर्गत संचालित सभी सरकारी, गैर-सरकारी एवं निजी विद्यालयों में कक्षा केजी से बारहवीं तक की सभी कक्षाओं में पठन-पाठन का कार्य 09 जनवरी तक पूर्णतः स्थगित रहेगा।
संबंधित विद्यालय प्रबंधन को आदेश का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, यदि उक्त अवधि में किसी विद्यालय में कक्षा 10वीं अथवा 12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षा पूर्व निर्धारित है, तो ऐसी परीक्षाओं का संचालन पूर्वाह्न 10:00 बजे के बाद ही किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन एवं आमजन से अपील की गई है कि बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। पर यह आदेश निजी स्कूलों के लिए कोई मायने नहीं रखता। क्योंकि किन्ही कारण से निजी स्कूल के संचालक सरकारी आदेश का पालन करना मुनासिब नहीं समझते। यही वजह है कि सरकारी आदेश को ठेंगा दिखाते बड़कागांव प्रखंड में कई स्कूली बच्चों को शुक्रवार को कड़ाके की ठंड और शीतलहरी में ठिठुरते हुए पैदल तथा विभिन्न वाहनों से स्कूल जाते देखा गया। कई निजी स्कूल इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं और बच्चों को ठंड में स्कूल बुला रहे हैं । जिससे अभिभावकों में रोष है। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है।बड़कागांव पी 2 प्राइवेट स्कूल के बच्चे बस का इंतजार करते।

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