10 हजार मानदेय और 3 रुपये कमीशन की मांग, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी
झारखंड के जन वितरण प्रणाली दुकानदारों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। हजारीबाग में आयोजित सम्मेलन में डीलरों ने आर्थिक सुरक्षा, बढ़ती महंगाई, और बकाया कमीशन के भुगतान की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी है कि एक माह में मांगें न माने जाने पर वे उग्र आंदोलन करेंगे।

हजारीबाग हमारे प्रतिनिधि झारखंड के जन वितरण प्रणाली दुकानदारों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हजारीबाग में आयोजित ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन की झारखंड प्रदेश इकाई के प्रांतीय सम्मेलन में राज्यभर के डीलरों ने हिस्सा लिया और सरकार की नीतियों के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया। एसोसिएशन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आगामी एक माह के भीतर उनकी न्याय संगत मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो प्रदेश के सभी 25,439 डीलर अपनी आजीविका और भोजन के अधिकार की रक्षा के लिए चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन और धरना-प्रदर्शन को बाध्य होंगे।
सम्मेलन के बाद प्रदेश अध्यक्ष सुरेश प्रसाद और महासचिव संजय कुण्डू हजारीबाग जिला अध्यक्ष नंदू प्रसाद ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपनी समस्याओं को रेखांकित किया। डीलरों की सबसे प्रमुख मांग आर्थिक सुरक्षा को लेकर है। संघ का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में दुकान का किराया, बिजली बिल और सहायकों की मजदूरी निकालना मुश्किल हो गया है। इसलिए राज्य सरकार सभी डीलरों को 10,000 प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि दे और खाद्यान्न वितरण पर कमीशन बढ़ाकर 3 रुपए प्रति किलो किया जाए। साथ ही पिछले लंबे समय से बकाया कमीशन राशि का भुगतान तुरंत किया जाए।इसके अलावा डीलरों ने पूर्व और वर्तमान विभागीय मंत्रियों द्वारा की गई घोषणाओं को धरातल पर उतारने की मांग की है। इसमें प्रदेश के लाभुकों को कुपोषण से बचाने के लिए सोयाबड़ी व सरसों तेल की योजना को शीघ्र लागू करने, मुख्यमंत्री दाल योजना को प्रतिमाह नियमित रूप से चलाने और जमशेदपुर से घोषित अबुआ चिकित्सा योजना' का लाभ डीलर परिवारों को देने की मांग शामिल है। संघ ने सरकारी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अनियमित खाद्यान्न आपूर्ति के कारण 'स्मार्ट पीडीएस' का वितरण प्रतिशत प्रभावित हो रहा है और आंशिक लाभुक राशन से वंचित हो रहे हैं। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक तराजू के नवीकरण के नाम पर माप-तौल विभाग द्वारा डीलरों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। डीलरों ने केंद्र सरकार के निर्देशानुसार ऑनलाइन वितरण व्यवस्था को पूरी तरह कागजमुक्त (पेपरलेस) करने झारखंड कंट्रोल एक्ट 2024' के तहत लाइसेंस ट्रांसफर के आदेश को जिला स्तर पर कड़ाई से लागू करने और सर्वर की समस्या को दूर करने के लिए एनआईसी में एक विशेष शिकायत कोषांग गठित करने की भी पुरजोर मांग की है। प्रस्ताव की कॉपियां मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, मुख्य सचिव और विभागीय सचिव को सौंप दी गई हैं।
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