बोले हजारीबाग : थोड़ा सहयोग मिले तो दुनिया के ट्रैक पर दौड़ेंगी शहर की बेटियां
हजारीबाग की बेटियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन किया है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में ओवरऑल चैंपियन बनकर उन्होंने साबित किया कि हौसला ही सबसे बड़ा संसाधन है। खिलाड़ियों को उचित सुविधाएं और संसाधन मिलें, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रोशन कर सकती हैं।
हौसला अगर बुलंद हो तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक पाती-यह बात हजारीबाग की बेटियों ने एथलेटिक्स मैदान में साबित कर दी है। सीमित साधनों के बावजूद इन बालिकाओं ने अपने जुनून से जिले का नाम ऊंचा किया है। हाल ही में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हजारीबाग टीम ने ओवरऑल चैंपियन बनकर यह दिखा दिया कि प्रतिभा को बस सही दिशा और थोड़ा सहयोग चाहिए। पर विडंबना यह है कि आज भी इन खिलाड़ियों के पास न सिंथेटिक ट्रैक है, न मेडिकल सहायता, न पौष्टिक आहार। हिन्दुस्तान के बोले हजारीबाग अभियान में कहा कि अगर हमें सही संसाधन मिलें, तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पदक हमारा होगा।
हजारीबाग। हजारीबाग में बालिकाओं की एक एथलेटिक्स टीम आवासीय प्रशिक्षण छात्रावास में सालों भर पदक लाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करती रहती है। जोश, उत्साह और जुनून में तो कोई कमी नहीं है कमी है तो बस संसाधनों में, सरकारी नीतियों में और उन अधिकारियों में जो इन बच्चियों की मेहनत को सही दृष्टि से देखना ही नहीं चाहते। हजारीबाग के इस छात्रावास संस्थान में झारखंड के विभिन्न जिलों से चयनित होकर लड़कियां आती हैं और उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। हाल में इन लड़कियों ने पूरे झारखंड में हजारीबाग का नाम रोशन किया है, क्योंकि हजारीबाग ओवरऑल चैंपियन रहा है। इस उपलब्धि के बाद भी यहां रह रही बच्चियों ने कई तरह की समस्याओं के बारे में बात की है। उनका कहना है कि अगर उचित सुविधाएं मिल जाएं, तो हम लोगों की पदक तालिका में काफी सुधार होगा तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत, झारखंड और हजारीबाग के झोली में स्वर्ण, रजत और कास्य पदक गिर सकते हैं। कोच नीरज राय बताते हैं कि हजारीबाग प्रमंडलीय मुख्यालय होने के बावजूद यहां एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए उपयुक्त मैदान नहीं है। एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए सिंथेटिक ट्रैक होना चाहिए, जहां 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर और 1600 मीटर सभी दूरी अंकित हों। एक साथ कई लड़कियां दौड़ लगाती हैं, इसलिए ग्राउंड में मल्टी-कलर ट्रैक बना होना चाहिए, जैसा ओलंपिक और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मानक रूप से प्रयोग होता है। बोकारो जिले के चंदनकियारी में ऐसा एथलेटिक्स ग्राउंड बना हुआ है, जबकि हजारीबाग में नहीं है। यहां का मैदान समतल नहीं है; उबड़-खाबड़ सतह के कारण खिलाड़ी अक्सर चोटिल हो जाते हैं। एक ही ग्राउंड में कई खेलों के खिलाड़ी प्रशिक्षण पाते हैं, जिससे भीड़ बढ़ जाती है। संत कोलंबा कॉलेज के सामने का ग्राउंड खेल से ज्यादा राजनीतिक सम्मेलनों के लिए प्रयोग होता है। विभिन्न रैलियों के कारण खिलाड़ियों को प्रशिक्षण में भारी समस्या होती है। खिलाड़ियों के छात्रावास में मेडिकल विंग की सुविधा नहीं है, जिसके कारण किसी तरह की समस्या होने पर उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल पाती। जिला प्रशासन को महिला छात्रावास में एक मेडिकल यूनिट बनवानी चाहिए, जहां दो नर्स और खिलाड़ियों की जरूरत के अनुसार दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक हो। एथलेटिक्स पावर का खेल है, इसलिए फिजियोथैरेपी और अच्छे जिम ट्रेनर की बहुत जरूरत होती है। खिलाड़ियों को फिजियोथैरेपी की सुविधा मिलनी चाहिए। साथ ही विशेष न्यूट्रिशन भी जरूरी है, इसलिए साई की तर्ज पर हजारीबाग के एथलेटिक्स खिलाड़ियों को ड्राई फ्रूट और फूड सप्लीमेंट्स मिलने चाहिए, ताकि वे लंबे समय तक बिना थके खेल सकें। खिलाड़ियों को अपने भविष्य की भी चिंता नहीं होनी चाहिए। इसलिए नेशनल लेवल पर पदक लाने वाले खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स कोटा के तहत सरकारी नौकरियों में बहाल किया जाना चाहिए। यह बहाली नियमित अंतराल पर होनी चाहिए, न कि 15 साल में एक बार। हजारीबाग में एथलेटिक्स खेल रही लड़कियों को फेडरेशन के खेलों में यात्रा भत्ता नहीं दिया जाता। अभ्यास के लिए मैदान की कमी प्रैक्टिस करने के लिए बालिकाओं को ग्राउंड की समस्या हो रही है। हजारीबाग में कर्जन ग्राउंड समतल नहीं है और एथलेटिक्स के लायक भी नहीं है। इसके लिए सिंथेटिक ग्राउंड की आवश्यकता है। हजारीबाग के जिला प्रशासन को इस पर ध्यान देते हुए सिंथेटिक ग्राउंड उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे एथलेटिक्स प्रैक्टिस कर रहे बच्चों को सुविधाजनक और सटीक प्रशिक्षण मिल सके। सिंथेटिक ग्राउंड में प्रैक्टिस अच्छी होती है और उस पर अभ्यास करने के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी निखार आता है। पदक विजेता को प्रोत्साहन नहीं एथलेटिक्स के कई खिलाड़ी नेशनल लेवल तक खेल चुकी हैं, लेकिन नेशनल खेलने के बावजूद भी उन लोगों के लिए खेल कोटे से सरकारी नौकरी का कोई प्रावधान नहीं है। नौकरी का प्रावधान नहीं होने से खिलाड़ियों को खेल के प्रति लगाव घट रहा है। नेशनल खेलने के बाद सरकारी नौकरी का प्रावधान होने से खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलेगा और वे अपना खर्च निजी कमाई से वहन कर सकेंगे। बता दें कि खेल खेलने में कई तरह के खर्च होते हैं। खिलाड़ियों की नौकरी होने पर वे वह खर्च स्वयं वहन कर पाएंगे। हॉस्टल में मेडिकल विंग नहीं आवासीय छात्राएं जहां रहकर एथलेटिक्स की प्रैक्टिस करती हैं, वहां न तो किसी मेडिकल विंग की सुविधा है और न ही एंबुलेंस की। खिलाड़ी खेलने के दौरान कई बार चोटिल हो जाते हैं और कई बार हड्डी टूटने या गंभीर चोट भी लगती है। इसके लिए मेडिकल विंग का होना अति आवश्यक है। मेडिकल सुविधा न होने से चोटिल छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही एंबुलेंस की सुविधा भी होनी चाहिए ताकि गंभीर रूप से घायल खिलाड़ियों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति होनी चाहिए हजारीबाग के आवासीय छात्रावास में एथलेटिक्स की प्रैक्टिस कर रही छात्राओं का कहना है कि अन्य राज्यों में जिस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर खेल से जुड़े खिलाड़ियों के लिए बना हुआ है, उसके हिसाब से हजारीबाग में इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर स्थिति बेहद कमजोर है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर होने से बड़े और अधिक खिलाड़ी प्रैक्टिस कर सकेंगे और जिले का नाम रोशन करेंगे। हजारीबाग में एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए फिजियोथैरेपिस्ट की भी कमी है। फिजियोथैरेपिस्ट होने से उन्हें किसी भी तरह की तकलीफ होने पर समय पर इलाज मिल सकेगा। प्रतियोगिताओं या प्रशिक्षण यात्राओं में भी इन्हें अपने जेब से खर्च करना पड़ता है, जो इन उभरती खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती है। नहीं मिलता है प्रोत्साहन कई खिलाड़ी स्टेट लेवल पर मेडल लाकर हजारीबाग और झारखंड का नाम रोशन कर चुके हैं। ऐसे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन के लिए कैश रिवार्ड मिलना चाहिए। कैश रिवार्ड मिलने से छात्राएं प्रेरित महसूस करेंगी और खेल में बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगी। नेशनल गेम्स की तरह स्टेट लेवल गेम्स में भी गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल लाने पर कैश रिवार्ड देने का प्रावधान शुरू करने की मांग आवासीय छात्राओं ने राज्य सरकार से की है। हजारीबाग के खिलाड़ी पूरे समर्पण और मेहनत से प्रशिक्षण लेते हैं, लेकिन खेल का मैदान समतल और मानक के अनुरूप न होने से तैयारी पर असर पड़ता है। इसके बावजूद हजारीबाग के खिलाड़ी निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में अपना विशेष स्थान बनाए रखते हैं, जो गर्व की बात है। -नीरज कुमार राय, एथलेटिक्स कोच अब खेल को केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि कैरियर के रूप में देखने की जरूरत है। संसाधन और प्रोत्साहन की कमी के कारण कई खिलाड़ी दो-चार साल में खेल छोड़कर सामान्य जीवन में लौट जाते हैं। इसलिए सरकार और संस्थानों को खेल को कैरियर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। -तापस चक्रवर्ती, पूर्व कोच व खिलाड़ी हजारीबाग में एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए उचित ग्राउंड की बहुत कमी है। यहां सिंथेटिक ग्राउंड होना चाहिए ताकि हम खिलाड़ी सुरक्षित और बेहतर तरीके से नियमित अभ्यास कर सकें। - पिंकी लकड़ा हमारे आवासीय छात्रावास में दूसरे संस्थान का ऑफिस चल रहा है, जिससे हम छात्राओं को बहुत असहज महसूस होता है। प्रशासन को तुरंत इस समस्या का समाधान करना चाहिए। -सोनी कुमारी एथलेटिक्स प्रैक्टिस के दौरान कई बार खिलाड़ी चोटिल हो जाते हैं, इसलिए छात्रावास में मेडिकल विंग और एंबुलेंस की सुविधा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए ताकि तुरंत इलाज मिल सके। -अनोखी कुमारी आदिवासी छात्रावास में सभी लड़कियां रहती हैं, इसलिए यहां सेनिटरी पैड वेंडिंग मशीन की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों का ध्यान रखा जा सके। -संजू कुमारी हम जैसे गरीब परिवार की छात्राओं को नेशनल खेलने जाने के लिए परिवहन सुविधा और फंडिंग की जरूरत होती है। सरकार को इसका खर्च उठाना चाहिए ताकि हम बिना चिंता के खेल सकें। -लक्ष्मी रानी फेडरेशन द्वारा आयोजित खेल प्रतियोगिताओं में हमें यात्रा भत्ता नहीं मिलता। इससे कई खिलाड़ी आर्थिक तंगी के कारण यात्रा करने और प्रतियोगिता में भाग लेने से भी पीछे हट जाते हैं। -सीमा कुमारी नेशनल स्तर पर खेलने के बाद भी हजारीबाग की खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी का लाभ नहीं मिलता। सरकार को नेशनल खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स कोटा से नौकरी की व्यवस्था करनी चाहिए। -लक्ष्मी कुमारी स्टेट लेवल पर पदक जीतकर लाने वाले खिलाड़ियों को भी कैश अवार्ड दिया जाना चाहिए। इससे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलेगा और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा बढ़ेगी। -पृथ्वी उरांव दूसरे राज्यों की तरह हजारीबाग में खेल से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद कमजोर है। अगर यहां आधुनिक सुविधाओं वाला बड़ा प्रशिक्षण केंद्र बने तो अधिक छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगी। -अनिमा कुमारी जिले की एथलेटिक्स खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के दौरान कई बार चोट या नस चढ़ने की समस्या होती है, इसलिए छात्रावास में स्थायी फिजियोथैरेपिस्ट की नियुक्ति बहुत जरूरी है। -मधु कुमारी हजारीबाग जिले की एथलेटिक्स खिलाड़ियों को साई की तरह ड्राई फ्रूट और फूड सप्लीमेंट दिए जाने चाहिए ताकि शरीर को पर्याप्त पोषण मिले और हम लंबे समय तक खेल में टिक सकें। -उषा कुमारी नेशनल लेवल गेम्स खेलने के लिए हमें दूर बड़े शहरों की यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने से मुश्किल होती है। सरकार को यात्रा फंडिंग की व्यवस्था करनी चाहिए। -रमी कुमारी

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