एलपीजी की किल्लत से जन जीवन अस्त व्यस्त

Apr 14, 2026 06:14 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हजारीबाग
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हजारीबाग में रसोई गैस एलपीजी की भारी कमी से जनजीवन प्रभावित हो गया है। जिले में गैस सिलेंडर का बैकलॉग 30,000 पार कर गया है। तकनीकी समस्याएं और शादी के सीजन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। उपभोक्ता सिलेंडर के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन आपूर्ति में सुधार नहीं हो रहा।

एलपीजी की किल्लत से जन जीवन अस्त व्यस्त

हजारीबाग हमारे प्रतिनिधि हजारीबाग में वर्तमान में रसोई गैस एलपीजी की भारी किल्लत ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थिति यह है कि जिले में गैस सिलेंडर का बैकलॉग 30 हजार की संख्या में पार कर चुका है। जिससे उपभोक्ताओं को समय पर रसोई गैस का ईंधन नहीं मिल पा रहा है। जंग की तपिश और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं ने इस संकट को और गहरा दिया है। हजारीबाग के गैस एजेंसियों के पास पेंडिंग बुकिंग का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। आलम यह है कि एक बार की गई बुकिंग का नंबर आने से पहले ही घर का सिलेंडर खत्म हो जा रहा है।जिससे

लोग दोबारा बुकिंग करने को मजबूर हैं। इस डबल बुकिंग की वजह से सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है और बैकलॉग का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि होम डिलीवरी व्यवस्था में पहले की तुलना में सुधार हुआ है, लेकिन धरातल पर उपभोक्ताओं का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।सिलेंडर वितरण में सबसे बड़ी बाधा ऑथेंटिकेशन कोड डीएसी को लेकर आ रही है। तकनीकी दिक्कतों या सर्वर डाउन होने के कारण कई बार उपभोक्ताओं के मोबाइल पर डीएसी नहीं पहुंच रहा है। जिसके बिना हॉकर सिलेंडर देने से मना कर देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और भी गंभीर है, जहां नेटवर्क की उपलब्धता कम है। डीएसी न मिलने के कारण डिलीवरी रुकी हुई है और बैकलॉग बढ़ता जा रहा है।शादियों के मौजूदा सीजन ने इस किल्लत को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। वैवाहिक कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त सिलेंडरों की मांग बढ़ गई है, लेकिन आपूर्ति न होने के कारण लोग दर-दर भटक रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला आपुर्ति कार्यालय में सिलेंडरों के लिए आवेदन करने वालों की कतार लग गई है। लोग शादी का कार्ड लेकर प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जाए।गैस की कमी के कारण अब हलवाई और कैटरर्स दोबारा पारंपरिक कोयले की भट्टियों की ओर रुख कर रहे हैं। भीषण गर्मी में कोयले की भट्टियों पर काम करना न केवल मुश्किल है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक साबित हो रहा है। तेज गर्मी और आग की लपटों के बीच काम करने से दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।घरेलू गैस की किल्लत का सीधा असर शहर के फास्ट फूड संचालकों पर भी पड़ा है। छोटे दुकानदार और ठेले वालों को समय पर बड़े कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में 5 किलो वाला छोटू सिलेंडर उनके लिए एकमात्र सहारा बनकर उभरा है। हालांकि, इनकी कीमत और रिफिलिंग में भी मारामारी देखी जा रही है। हजारीबाग में गैस संकट ने रसोई से लेकर शादी-ब्याह तक के बजट और व्यवस्था को बिगाड़ दिया है। यदि जल्द ही आपूर्ति में तेजी नहीं लाई गई और डीएसी जैसी तकनीकी बाधाओं को दूर नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी विकट हो सकती है।

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