ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News झारखंड हज़ारीब़ागनहीं रहीं हजारीबाग की पहली महिला विधायक रानी डे

नहीं रहीं हजारीबाग की पहली महिला विधायक रानी डे

हजारीबाग की पहली महिला विधायक रानी डे (85)का रांची में निधन रांची के मोरहाबादी स्थित आवास में हो गया। वह 1977 से 1980 तक जनता पार्टी से हजारीबाग...

नहीं रहीं हजारीबाग की पहली महिला विधायक रानी डे
हिन्दुस्तान टीम,हजारीबागFri, 08 Dec 2023 12:30 AM
ऐप पर पढ़ें

हजारीबाग, वरीय संवाददाता।
हजारीबाग की पहली महिला विधायक रानी डे (85)का रांची में निधन रांची के मोरहाबादी स्थित आवास में हो गया। वह 1977 से 1980 तक जनता पार्टी से हजारीबाग में विधायक रहीं थी। उनका यहां न्यू एरिया की चौथी गली में अपना मकान है। कुछ वर्षों पूर्व सभी लोग रांची में शिफ्ट कर गए। पति बैंकुठनाथ डे (94) वर्ष के वयोवृद्ध हैं। वह रांची हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। उनके नाती और हजारीबाग के पूर्व जिला अवर निबंधक सुभाष कुमार दत्ता ने बताया कि वह पिछले 15 दिन रांची के रामप्यारी हॉस्पिटल में भर्ती थीं। वहां वह अर्द्धबेहोशी स्थिति में थीं। जहां से उन्हें डॉक्टरों की सलाह पर घर ले आया गया था। जहां उन्होंने गुरुवार की शाम साढ़े चार बजे अंतिम सांस ली। उन्होंने बताया कि उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को उनके पैतृक आवास गोमिया के साड़म में होगा। वहीं दामोदर नदी तेनुघाट डैम के किनारे अंतिम संस्कार किया जाएगा।

नीडर विधायक थीं: स्वरुप चंद जैन

उनके जानने पहचानने वालों में शोक संवेदनाओं का तांता लग गया। जयप्रकाश आंदोलन के दौरान उनके पति बैकुंठनाथ डे के साथ हजारीबाग जेल की यात्रा करने वाले 84 वर्षीय स्वरूप चंद जैन कहते हैं कि रानी डे बहुत ही नीडर विधायक थीं। वह 1974 आंदोलन से भी जुड़ी थी और पति के साथ ही आंदोलन में भाग लेती थी। रानी डे सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए शहर के विभिन्न इलाकों में सक्रिय रहती थीं। रामनवमी जुलूस को जामा मसजिद से पार कराने में बढ़चढ़कर भागीदारी निभाती थी। वह बताते हैं कि तब उनका आवास जामा मसजिद रोड में ही था। उस समय रामनवमी के दौरान उनके ही आवास स्थित कार्यालय में उनकी और प्रशासन के अन्य लोगों बैठकी होती थी।

याद है 65 वर्ष की उम्र में नानी वह दिलेरी: सुभाष चंद दत्ता

उनके नाती और लोहरदगा के जिला अवर निबंधक सुभाष दत्ता बताते हैं कि तब वह मार्खम कॉलेज के विद्यार्थी थे। मार्खम कॉलेज में फी को लेकर छात्र आंदोलित थे। अचानक देखता हूं कि नानी को मोटसाइकिल पर बिठा कर लड़के रानी डे जिंदाबाद का नारा लगाते हुए आ रहे हैं। दरअसल उन्होंने लड़कों के समर्थन में जोरदार आंदोलन किया था। जिसपर प्रिंसिपल को फी बढ़ौतरी को वापस लेना पड़ा था।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें