डॉ. भैया विवेक प्रियदर्शी को अज्ञेय सृजन शिखर सम्मान
हजारीबाग के डॉ. विवेक प्रियदर्शी को साहित्य और रचनात्मक लेखन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अज्ञेय सृजन शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके साझा काव्य संग्रह 'काव्य संवेदना' में योगदान के लिए दिया गया। पहले भी उन्हें जय शंकर प्रसाद साहित्य गौरव सम्मान मिल चुका है।

हजारीबाग। वरीय संवाददाता साहित्य और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हजारीबाग के डॉ. भैया विवेक प्रियदर्शी को अज्ञेय सृजन शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें साझा काव्य संग्रह काव्य संवेदना में उनके भावपूर्ण एवं उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया गया। उन्होंने बांझ का दर्द कविता लिखकर लोगों को सोचने पर मजबूर किया है। यह सम्मान महाराष्ट्र स्थित इंकलाब पब्लिकेशन द्वारा प्रदान किया गया है। सम्मान पत्र में कहा गया है कि डॉ. प्रियदर्शी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य जगत में संवेदनाओं और सृजनात्मकता को नई ऊंचाई दी है। यह सम्मान 17 मई 2026 को जारी किया गया।
इससे पहले भी डॉ प्रियदर्शी को उनके लेखन के लिए जय शंकर प्रसाद विचार मंच, रांची ने हिन्दी दिवस समारोह के मौके पर 20 सितम्बर 2025 को जय शंकर प्रसाद साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया है। विदित हो कि हाल में ही वर्ष 2026 में उनकी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। जनवरी माह में उनकी पुस्तक फाउंडेशन ऑफ लॉ एंड जस्टिस प्रकाशित हुई। इसके बाद अप्रैल में इंग्लिश सिंस टाइम टू प्रजेंट तथा मई में फैमिली लॉ इन चेंजिंग सोसाइटी और छायावाद और महादेवी वर्मा पाठकों के बीच आईं। इसी महीने उनकी नई पुस्तक एल्गोरिदम लॉ भी प्रकाशित होने जा रही है। उनकी कुछ पुस्तकें बुक रिवर, दिल्ली तथा कुछ ड्रीम बुक पब्लिकेशन, मेरठ से प्रकाशित होंगी। जून और जुलाई में उनकी दो हिंदी पुस्तकें छायावादोत्तर हिंदी साहित्य तथा भारतीय साहित्य में स्त्री विमर्श भी आने वाली हैं। विवेक प्रियदर्शी ने महावीर प्रसाद द्विवेदी पर पीएचडी की है।
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