पूर्व विधायक अंबा ने शांति पूर्ण आंदोलन कार्रवाई पर उठाए सवाल
हजारीबाग में पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने विस्थापित ग्रामीणों के शांतिपूर्ण आंदोलन पर प्रशासनिक कार्रवाई की आलोचना की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने उनके संवैधानिक अधिकारों की मांग करने पर दमनात्मक रवैया अपनाया। बिरजू महतो को बिना पूर्व सूचना के हिरासत में लिया गया, जिससे विस्थापितों में रोष है।

हजारीबाग। वरीय संवाददाता पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने विस्थापित ग्रामीणों के शांतिपूर्ण आंदोलन पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में कहा है कि ग्रामीणों का आरोप है कि अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर धरना दे रहे विस्थापितों पर जिला प्रशासन और पुलिस दमनात्मक रवैया अपना रही है। ग्रामीणों का कहना है कि केरेडारी प्रखंड के पगार क्षेत्र में दर्ज कांड संख्या 136/25 इस दमन का उदाहरण है। आरोप लगाया गया है कि जिस घटना में किसी व्यक्ति को कोई गंभीर चोट नहीं आई, उसमें पुलिस ने अत्यंत गंभीर धाराएं लगाते हुए हत्या के प्रयास जैसे आरोप जोड़ दिए।
इसे राजनीतिक और प्रभावशाली दबाव में की गई कार्रवाई बताया जा रहा है। सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी से पूर्व नोटिस देने संबंधी दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप भी लगाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार हाल ही में आंदोलनकारी बिरजू महतो को धरना स्थल से बिना किसी पूर्व सूचना के हिरासत में लेकर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। आरोप है कि थाने में विस्थापितों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। इन घटनाओं के बाद विस्थापितों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या कानून सबके लिए समान है या फिर गरीब और कमजोर वर्गों के लिए अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं।

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