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बेंगाबाद: मोतीलेदा में गाजर की खेती कर आत्मनिर्भर बन रही हैं कृषक महिलाएं

बेंगाबाद: मोतीलेदा में गाजर की खेती कर आत्मनिर्भर बन रही हैं कृषक महिलाएं

संक्षेप:

बेंगाबाद के मोतीलेदा में ग्राम संगठन से जुड़ी महिलाएं गाजर की खेती कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। लगभग तीन एकड़ जमीन पर गाजर की खेती से प्रति महिला कृषक को 15,000 रुपए से अधिक मुनाफा हो रहा है। महिलाएं स्थानीय बाजार में गाजर बेचकर स्वावलंबी बन रही हैं।

Jan 05, 2026 05:27 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गिरडीह
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बेंगाबाद, प्रतिनिधि। बेंगाबाद के मोतीलेदा में बड़े पैमाने पर गाजर की खेती कर ग्राम संगठन की महिलाएं आत्मनिर्भर की और बढ़ रही हैं। ग्राम संगठन से जुड़ी महिला कृषक अपनी आय बढाने के लिए केवल सब्जी की खेती ही नहीं बल्कि कृषि के क्षेत्र में लगातार परिवर्तन कर उससे अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। इस वर्ष गाजर की खेती कर वह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। मोतीलेदा में पहली बार लगभग तीन एकड़ जमीन पर महिला कृषकों द्वारा गाजर की खेती से अपने जीवन में मिठास घोल रही है। पंजाब के तौर पर बेंगाबाद के मोतीलेदा में पहली बार गाजर की खेती की जा रही है।

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खेती कार्य में गांव के लगभग 25 महिला कृषक शामिल हैं। इन महिला कृषकों ने अपनी अपनी जमीन पर गाजर की खेती कर रही है। महिलाओं की मेहनत से बंजर पड़ी जमीन पर गाजर की फसल लहलहा रही है। बेंगाबाद जेएसएलपीएस द्वारा इन महिलाओं को गाजर की खेती के लिए प्रशिक्षित किया गया था। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद परीक्षण के तौर पर गत वित्तीय वर्ष थोड़ी बहुत इसकी खेती की गई थी, लेकिन इस वर्ष तीन एकड़ भूखंड पर गाजर की खेती की जा रही है। अगले वर्ष वृहद पैमाने पर गाजर की खेती करने का भी लक्ष्य निर्धारित कर लिया गया है। प्रखंड बीपीएम संजय कुमार ने कहा कि मोतीलेदा में लगभग तीन एकड़ जमीन पर महिलाएं गाजर की खेती कर रही है। गाजर की खेती से प्रति महिला कृषक सीजन में पंद्रह हजार रुपए से अधिक मुनाफा कमा सकती हैं। कहा कि दस डिसमिल जमीन पर गाजर के उत्पादन के हिसाब से एक महिला कृषक पंद्रह से लेकर बीस हजार रुपए तक की आमदनी कर सकती हैं। बाजार भाव के मुताबिक गाजर 50 से लेकर 60 रुपए प्रति किलो बिकता है जबकि तीन एकड़ जमीन पर लगे गाजर का अनुमानित मुनाफा लगभग चार लाख रुपए तक आंका जा रहा है। प्रति महिलाएं दस डिसमिल से अधिक जमीन पर गाजर की खेती कर रही हैं। इधर, कलस्टर कॉर्डिनेटर महेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि महिलाएं गाजर की खेती कर काफी खुश हैं और गाजर की खेती से वह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। कहा कि सीमित सिंचाई पर गाजर का बंपर उत्पादन होता है। महिलाएं स्थानीय बाजार एवं गिरिडीह शहर की मंडी में इसे थोक भाव में बिक्री करती हैं। कभी घरों तक सीमित रहनेवाली महिलाएं ग्राम संगठन से जुड़ कर एक कुशल किसान की भूमिका निभा रही हैं। यह प्रखंड क्षेत्र की अन्य महिला कृषकों के लिए प्रेरणादायक साबित हो रही है। महिलाएं अपने परिश्रम के बलबूते गाजर के अलावा सब्जी की खेती कर स्वावलंबी बन रही हैं।