पांच दिनों में पहल नहीं होने पर प्रखंड मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन: ग्रामीण

Newswrap हिन्दुस्तान, गिरडीह
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पीरटांड़, प्रतिनिधि। पारसनाथ की तराई में बसे आधा दर्जन आदिवासी गांव में सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों की बैठक हुई। प्रसूता को खटिया में टांगकर अस्पताल भेजने के बाद से ग्रामीण आक्रोशित हैं। सड़क की समस्या को लेकर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है। यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

पांच दिनों में पहल नहीं होने पर प्रखंड मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन: ग्रामीण

पीरटांड़, प्रतिनिधि। पारसनाथ की तराई में बसे आधा दर्जन आदिवासी बहुल गांव में रविवार को पक्की सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में गांव तक सड़क जैसी मूलभूत सुविधा की मांग को लेकर ग्रामीण आंदोलन के मूड में हैं। सड़क की समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन का मन बनाया है। बतला दें कि सड़क के अभाव में दलुवाडीह निवासी प्रसूता को खटिया में टांगकर अस्पताल भेजने के बाद से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। सनद रहे कि बुधवार को दलुवाडीह निवासी सुनीता सोरेन के प्रसव के बाद अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। ग्रामीणों के लाख प्रयास के बावजूद जर्जर सड़क के कारण गांव तक एम्बुलेंस नही पहुंच पाई। नतीजा सड़क के अभाव में ग्रामीणों ने उसे खटिया में टांगकर अस्पताल भेजवाना पड़ा। हालांकि इलाज के बाद महिला स्वस्थ्य है पर गांव की जर्जर सड़क ने ग्रामीणों को आंदोलन को बाध्य कर दिया है। पारसनाथ मौजा के लगभग आधा दर्जन आदिवासी बहुल गांव के ग्रामीण लंबे समय से सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। घटना के बाद से ग्रामीणों में आक्रोश है। क्षेत्र के ग्रामीण सड़क जैसी मूलभूत सुविधा की मांग पर अडिग हैं। बात नहीं बनती देख उत्तरी पारसनाथ मौजा के आधा दर्जन गांव के ग्रामीणों ने बैठक कर न केवल आक्रोश व्यक्त किया बल्कि शासन प्रशासन को भी जगाने का प्रयास किया है.

सड़क समस्या पर चर्चा

सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में आहूत बैठक में सड़क समस्या का मुद्दा छाया रहा। ग्रामीणों ने एक स्वर में सड़क निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव गांव में सड़कें बन रही हैं पर विडम्बना है कि आदिवासी गांव की ओर प्रशासन की दृष्टि नहीं पहुंच पाई है। आखिर कबतक क्षेत्र के लोग खटिया में टांगकर मरीज को अस्पताल तक ले जाएंगे। कहा कि चुनाव के वक्त आश्वासन मिलता है। बाद में सब भूल जाते हैं। इस बार चुनाव में नेताओं को सबक सिखाया जायेगा। कहा कि अब सब्र का बांध टूट गया है। ग्रामीणों ने कहा कि पांच दिन के अंदर शासन प्रशासन द्वारा पहल नहीं की गई तो ग्रामीण आंदोलन को बाध्य होंगे। मामले को लेकर जिला उपायुक्त के नाम आवेदन तैयार किया जा रहा है। पांच दिनों के अंदर बात नहीं बनी तो छठे दिन प्रखण्ड मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन किया जायेगा.

आदिवासी गांवों की स्थिति

गौरतलब है कि मधुबन पंचायत अंतर्गत पारसनाथ मौजा के लगभग आधा दर्जन गांव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। आजादी के वर्षों बीत जाने के बाद भी गांव के ग्रामीणों को पक्की सड़क नसीब नहीं हो पायी है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को रोज परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पगडंडियों के सहारे ग्रामीणों को मधुबन तक पैदल आना-जाना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में सड़क व पुल पुलिया के अभाव में कई गांव टापू बनकर रह जाते हैं। पारसनाथ मौजा का कुरुवाटांड़, दहिया, जराबाद, दलुवाडीह, शहरबेड़ा, सतकटिया, बरवाबेड़ा, जिरवाबेड़ा गांव के ग्रामीणों का पगडंडी ही सहारा है। गांव के ग्रामीणों को विषम परिस्थिति में मरीज को खटिया में टांगकर अस्पताल तक ले जाने में विवश हैं.

सामान्य प्रश्न

ग्रामीणों ने सड़क की मांग को लेकर क्या निर्णय लिया?
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
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