बदहाली पर बहा रहा है आंसू तिसरी का वन विश्रामागार
बाबूलाल की कोशिश भी हुई नाकाम अन्य अतिथियों के ठहरने के लिए तिसरी में लाखों रुपए की लागत से बनाया गया वन विश्रामागार भवन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रह

संजीत सिन्हा तिसरी। तिसरी का अनमोल धरोहर वन विश्रामागार के जीर्णोद्धार का मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के प्रयास के बावजूद वन विश्रामागार के जीर्णोद्धार का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
वन विश्रामागार की बदहाली
मालूम हो कि बड़े नेता, अफसर और अन्य अतिथियों के ठहरने के लिए तिसरी में लाखों रुपए की लागत से बनाया गया वन विश्रामागार भवन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उक्त भवन की दीवारों पर पड़ी दरारें और झाड़ियों से लिपटी चहारदीवारी व भवन इसकी बदहाली को बखूबी बयां कर रहा है। इसी के मद्देनजर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कुछ माह पहले बदहाली पर आंसू बहा रहे तिसरी के वन विश्रामागार का मुआयना किया था। तत्पश्चात उन्होंने मौके पर ही पीसीसीएफ और गिरिडीह डीएफओ से फोन पर बात कर वन विश्रामागार के जीर्णोद्धार करवाने की बात कही थी। पीसीसीएफ ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए इसका जीर्णोद्धार करवाने की बात कही थी। लेकिन अभी तक न तो वन विभाग इसकी सुध ले रहा है और न ही इसके जीर्णोद्धार का काम ही शुरू हो पाया है। जिसके कारण तिसरी की एक पहचान व धरोहर मिटने के कगार पर है।
पूर्व मुख्यमंत्री का योगदान
बता दें कि तिसरी के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में 2001-02 ई. में तिसरी के पुराने प्रखड कार्यालय भवन के पीछे पहाड़ पर बहुत ही खूबसूरत और आलीशान वन विश्रामागार भवन बनवाने का काम किया था। ताकि तिसरी का रौनक बढ़ सके और यहां आनेवाले नेतागण, अफसर और अतिथिगण इस भवन में ठहर सके। इसी नियत से पहाड़ के ऊपर बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक अतिथि भवन बनवाया गया था। यह रेस्ट हाउस हाल के दिनों तक गुलजार था। जो लोग यहां आते थे या ठहरते थे उन्हें पहाड़ पर बना विश्रामागार भवन काफी भाता, लुभाता और अपनी ओर आकर्षित करता था। इतना ही नहीं बल्कि तिसरी में किसी के यहां अतिथि आने पर उन्हें पहाड़ पर बना गेस्ट हाउस घुमाने व दिखाने के लिए ले जाया जाता था। बाबूलाल मरांडी सरीखे बड़े-बड़े नेता भी इस भवन में ठहरते थे। डीसी, एसपी, डीएफओ, आरसासीएफ सहित कई विभाग के बड़े - बड़े अधिकारी भी यहां ठहर चुके हैं।
भवन की देखभाल की कमी
लेकिन अब यह वन विश्रामागार भवन देख-रेख के अभाव में खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। उक्त भवन की दीवारों पर दरारें पड़ गई हैं, फर्श टूट रही है। भवन की बाहरी दीवार और पूरी छत पर काई जम गया है। भवन की चहारदीवारी के अंदर झाड़ियां भर गई है। किंतु इसकी देखभाल करनवाला कोई नहीं है। उल्लेख्य रहे कि तिसरी में कई वन कर्मी रहते हैं। लेकिन इसकी देखरेख करनेवाला कोई नहीं है। यही कारण है कि वन विश्रामागार भवन में लगाया गया एसी सहित सोफ़ासेट,डाइनिंग टेबल, कुर्सी और अन्य सामग्रियों को भी मनमानी तरीके से ले जाने की सूचना है। बहरहाल, तिसरी के वन विश्रामागार भवन की देखरेख करने के लिए वन विभाग द्वारा एक दरबान को रखा गया था। वह दरबान वन विश्रामागार की रखवाली करते ही थे। साथ ही इसकी साफ सफाई पर भी पूरा ध्यान रखते थे। जब तक वह दरबान इसकी देखरेख के लिए यहां थे। तब तक यह भवन भी चकाचक और गुलजार रहा करता था किंतु दरबान के हटते ही यह वन विश्रामागार अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
चित्र परिचय - 28 जीआरडी 171 बदहाल है तिसरी का धरोहर वन विश्रामागार।
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