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मुफलिसी में जी रहे हैं दृष्टिबाधित पांच भाई-बहन

मुफलिसी में जी रहे हैं दृष्टिबाधित पांच भाई-बहन

संक्षेप:

पीरटांड़ के करमाटांड़ गांव में एक ही परिवार के पांच दृष्टिबाधित भाई-बहन मुफलिसी का जीवन जी रहे हैं। 65 वर्षीय मोहम्मद जाफर अपने 16 सदस्यीय परिवार का भरण पोषण मुर्गी बेचकर करते हैं। दृष्टिहीनता के...

Oct 18, 2024 02:16 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गिरडीह
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पीरटांड़। पीरटांड़ प्रखंड के करमाटांड़ गांव में एक ही परिवार के दृष्टिबाधित पांच भाई-बहन मुफलिसी की जिंदगी जीने को विवश हैं। सोलह सदस्यों का इस परिवार का भरण पोषण का जिम्मा परिवार के वृद्ध मोहम्मद जाफर के कंधों पर है। दृष्टिबाधित सभी सदस्य मोहम्मद जाफर के बेटा-बेटी हैं। सभी आपस में भाई-बहन के रिश्ते में हैं। चिकित्सीय परामर्श व देवी-देवता के पास फरियाद लगाने के बाद भी सदस्यों की आंखों की रौशनी नहीं लौट पाई है। बताया जाता है कि पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत चिलगा पंचायत के करमाटांड़ गांव निवासी 65 वर्षीय मोहम्मद जाफर अपने पांच दृष्टिबाधित बेटा-बेटी का बोझ अपने कंधों पर ढो रहा है। मोहम्मद जाफर 65 वर्ष की उम्र में हाट बाजार में मुर्गी बेचकर परिवार के 16 सदस्यों का भरण पोषण करते हैं। दृष्टिबाधित बेटा-बेटी के पेंशन की राशि व मुर्गी की कमाई से परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुगाड़ करना मुश्किल है। खेती बारी तथा खाद्य आपूर्ति से मिलने वाला अनाज भरण पोषण में सहयोगी साबित हो रहा है। मोहम्मद जाफर के तीन बेटा तथा सात बेटियां है। जिसमें से तीन बेटा व तीन बेटी जन्म से ही दृष्टीबाधित है। एक बेटी साजिदा व दामाद की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। एक ही परिवार के सदस्य आशिक हुसैन, आसीन हुसैन, ताज हुसैन तथा बहन हसीना खातून, नाजिया खातून जन्म से ही दृष्टिबाधित है। अन्य चार लड़की स्वस्थ्य है। परिवार के पिता मोहम्मद जाफर को एक आवास जरूर मिला है पर सोलह सदस्यों के लिए एक घर नाकाफी है। एक पक्का मकान व खपरैल झोपड़ी में किसी तरह लोग जीवन बिताने को मजबूर हैं।

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इस बाबत मोहम्मद जाफर ने बताया कि दस बेटा बेटी में छह बच्चे जन्म से ही दृष्टिबाधित है। एक बेटी दामाद की सड़क दुर्घटना में जान चली गई। उनके भी दो छोटे छोटे बच्चे हैं। चार दृष्टिबाधित बच्चे का पेंशन, राशन व हाट बाजार में मुर्गी बेचकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। जैसे तैसे दो वक्त की रोटी जुगाड़ हो जाती है पर सोलह सदस्यों के परिवार के लिए एक छत नाकाफी है। एक बच्चे का पेंशन अबतक नहीं मिल पाया है। मोहम्मद जाफर की पत्नी (दृष्टिबाधित बच्चे की मां) ने कहा कि किस कर्म का फल है पता नहीं। चिकित्सीय परामर्श के अलावा देवी-देवता के यहां फरियाद लगाने के बाद भी बच्चों की आंखों मे रोशनी नही लौट पाई है।