संतों का संगत और भगवान की कथा दुर्लभ है: नरेंद्राचार्य
गिरिडीह के श्याम मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गुरूवार को श्री नरेंद्राचार्य जी महाराज ने धन की असली दुर्लभता के बारे में बताया। उन्होंने संतों की संगत और भगवान की कथा को सबसे मूल्यवान बताया। कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ थी, जो भाव विभोर होकर कथा सुन रहे थे।

गिरिडीह, प्रतिनिधि। शहर के श्याम मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गुरूवार को श्री नरेंद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि धन संपदा तो एक पानी के घर में भी होता है, पर संसार में दुलर्भ क्या है? उन्होंने कहा कि संतों का संगत और भगवान की कथा ही दुर्लभ है। संसार में जितने भी लाभ होते हैं, उससे हमारा भला होनेवाला नहीं है। संपदा और धन हमें मिलता है तो उससे हमें दुख भी मिलता है। श्री नरेंद्राचार्य जी महाराज ने भगवान श्री राम व भरत को लेकर कहा कि जब भगवान श्रीराम वनवास जाने को थे। इससे पूर्व भरत प्रयागराज पहुंचे।
एकांत में जाकर गंगा मां से कहा कि मैं वह अभागा हूं, जो कुल की परंपरा को ताक पर रखने जा रहा हूं। कहा कि मुझे अर्थ नहीं चाहिए। इसी अर्थ के कारण घर में अनर्थ हुआ है। कहा कि हमें धर्म भी नहीं चाहिए। पिताजी धर्म की रक्षा करते-करते प्राण त्याग दिए। कहा कि उन्हें राघव जी का चरण चाहिए। तीसरे दिन की कथा सुनने श्याम मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हुए थे। संगीतमयी कथा सुन श्रद्धालु भाव विभोर नजर आ रहे थे। बता दें कि श्री श्याम मंदिर में मारवाड़ी ब्राह्मण चैरिटेबल ट्रस्ट गिरिडीह द्वारा भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। श्रीमद् भागवत कथा 26 मई से शुरु हुआ है, जिसका समापन 1 जून को होगा।चित्र 28 जीआरडी 51 व 52 श्रीमद्भागवत कथा कहते श्री नरेंद्राचार्य जी महाराज व कथा का श्रवण करते श्रद्धालु।
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