दोपहर में ‘लॉकडाउन’ जैसे हालात, जनजीवन अस्त-व्यस्त
झारखंड में भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। सुबह 10 बजे से हीट वेव का असर शुरू होता है, जो दोपहर में विकराल रूप ले लेता है। बाजारों में सन्नाटा और सड़कों पर आवागमन ठप हो गया है। जलस्तर घटने से जल संकट गंभीर हो रहा है, और मजदूरों के लिए रोजी-रोटी का संकट बढ़ता जा रहा है।

झारखंडधाम, प्रतिनिधि। क्षेत्र में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मार्तंड सूर्य की प्रचंड किरणें मानो अग्नि शलाकाओं की तरह धरती को झुलसा रही हैं। सुबह करीब 10 बजे से ही हीट वेव का असर शुरू हो जाता है, जो दोपहर तक विकराल रूप ले लेता है। आलम यह है कि दोपहर होते-होते बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है और सड़कों पर आवागमन लगभग ठप हो जाता है। गलियां सूनी नजर आती हैं, जिससे पूरे इलाके में ‘लॉकडाउन’ जैसे हालात महसूस किए जा रहे हैं। गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
भीषण तापमान के कारण उन्हें पानी और छांव की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कुएं, तालाब और तलैयों का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे जल संकट की स्थिति और गंभीर होती जा रही है। भीषण गर्मी का असर निर्माण कार्यों पर भी पड़ा है। तेज धूप और लू के कारण अधिकांश निर्माण कार्य ठप हो गए हैं, जिससे दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है। मजदूर वर्ग के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक बनती जा रही है। इधर, लग्न के मौसम में लोगों को भीषण गर्मी के बावजूद शादियों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। तेज धूप में सफर करने के कारण कई लोग बीमार पड़ने लगे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। पेयजल व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। जल नल योजना अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो पाई है, वहीं नए चापानलों की स्थापना भी नहीं हो रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
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