Gridih News: श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर रातभर डटे रहे एसपी
Gridih News: श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस अधिकारियों ने रातभर सेवा शिविर में डटे रहकर स्थिति का जायजा लिया। हजारों श्रद्धालु बराकर नदी से जल उठाकर पैदल दु:खिया महादेव मंदिर पहुंचे। पुलिस ने भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई और गोताखारों को भी तैनात किया ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Gridih News: गिरिडीह। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर रातभर एसपी-डीएसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारी गिरिडीह-डुमरी मुख्य पथ पर गिरिडीह पुलिस द्वारा लगाये गये सेवा शिविर में डटे रहे। इसी शिविर से एसपी बराकर से जल उठाकर पैदल दु:खिया महादेव मंदिर जा रहे हजारों श्रद्धालुओं को लेकर पल-पल की जानकारी लेते रहे। एसपी डॉ बिमल कुमार, डीएसपी (मु.) प्रथम नीरज कुमार सिंह, डीएसपी (मु.) द्वितीय रूपेंद्र कुमार राणा, एसडीपीओ जीतबाहन उरांव, मुफस्सिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो समेत कई अन्य पुलिस अधिकारी श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर स्वयं तैनात रहे। मध्य रात्रि के बाद लगभग सवा एक बजे एसपी अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ दु:खिया महादेव मंदिर पहुंचे और अहले सुबह से दर्शन व जलार्पण के लिए जुटने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की गयी व्यवस्था का जायजा लिया।
पुलिस का तैनाती और दिशा-निर्देश
इस दौरान एसपी ने दर्शन में श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और भीड़ नियंत्रित रहे इसको लेकर भी एसपी ने मंदिर में सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया।
बराकर नदी से जल उठाने की परंपरा
बता दें कि सावन पूर्णिमा के अवसर पर बराकर नदी से जला उठाकर दु:खिया महादेव मंदिर जलार्पण करने की गिरिडीह में वर्षों पुरानी परंपरा रही है। 27 अगस्त की रात गिरिडीह एवं इसके आस-पास के हजारों की संख्या में श्रद्धालु बराकर नदी से जल उठाकर पैदल दु:खिया महादेव मंदिर पहुंचें और शुक्रवार की सुबह जलार्पण किया। इसको लेकर पुलिस-प्रशासन द्वारा 27 अगस्त की संध्या छह बजे से 28 अगस्त की सुबह 05 बजे तक शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। श्रद्धालु रात्रि में बराकर नदी से जल उठाकर पैदल पपरवाटांड़, बड़ा चौक, बरवाडीह, अजीडीह होते हुए दुखिया महादेव मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में किसी बड़ी अप्रिय घटना घटित न हो इसको लेकर शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर 11 घंटे के लिए रोक लगाई गई थी। इसके अलावा बराकर नदी में गोताखारों को तैनात किया गया था。


