चिंताजनक: गरीब बच्चों का निजी स्कूलों में 46.63 फीसदी ही नामांकन
गिरिडीह जिले में आरटीई-2009 के तहत निजी स्कूलों में नामांकन में प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में महज 46.63 फीसदी नामांकन हुआ है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया और आवश्यक कागजात की जटिलता ने अभिभावकों को परेशान किया है। 491 सीटों में से केवल 229 बच्चों का नामांकन हुआ है।

सियाटांड़ (गिरिडीह)। गिरिडीह जिले में आरटीई(राइट टू एजुकेशन)-2009 के तहत निजी स्कूलों में नामांकन में जिला प्रशासन की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई है। इसका जीता-जागता उदाहरण यह है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 का दूसरा महीना चल रहा है और आरटीई के तहत निजी स्कूलों में मात्र 46.63 फीसदी ही नामांकन हुआ है। बताते चलें कि शहरी क्षेत्रों में ही रिक्त सीटों की संख्या अधिकतम है, जो एक गंभीर समस्या को दर्शाता है। ऑनलाइन आवेदन व आवश्यक कागजात ने बढ़ाई लोगों की परेशानियां
आरटीई-2009 एक्ट की जानकारी
बताते चलें कि आरटीई-2009 एक्ट के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी-प्रथम कक्षा में कुल नामांकन सीटों के विरुद्ध 25 फीसदी सीटों पर निःशुल्क एडमिशन लेना है। इसके लिए झारखंड में प्रत्येक जिले में ऑनलाइन आवेदन के लिए आरटीई के नाम से स्पेशल पोर्टल तैयार किया गया है। जहां से अभिभावक ऑनलाइन आवेदन कर अपने क्षेत्र के स्कूलों का चयन कर सकते हैं। इस वर्ष भी 10 से 25 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन के लिए पोर्टल खोला गया था; परंतु प्रचार-प्रसार के अभाव में लोगों ने निर्धारित सीटों से भी कम आवेदन किया। पहले यह प्रक्रिया ऑफलाइन स्कूलों द्वारा ही की जाती थी; परंतु पिछले कुछ वर्षों से ऑनलाइन आवेदन ने अभिभावकों की टेंशन बढ़ा दी है। साथ ही ऑनलाइन आवेदन के लिए आवश्यक कागजात सहित अन्य जटिल प्रक्रिया के कारण लोग आवेदन नहीं कर पाते हैं।
नामांकन की स्थिति
491 सीटों के विरुद्ध महज़ 229 नामांकन
जिला प्रशासन ने आरटीई के तहत जिले में संचालित 36 निजी स्कूलों में 491 सीटों के लिए नामांकन आमंत्रित किया था। जिसमें प्रथम सूची में 212 (02.04.2026) व द्वितीय सूची में 17 (21.04.2026) अर्थात कुल 229 बच्चों का का नामांकन हो सका और इस प्रकार 262 सीटें अबतक रिक्त है। प्रतिशत में बात करें तो आधे से भी कम मात्र 46.63 प्रतिशत बच्चों का ही नामांकन हुआ है वहीं 53.37 प्रतिशत सीटें रिक्त हैं।
आरटीई में नामांकन के मापदंड
क्या है आरटीई में नामांकन के मापदंड
1.एसटी/एससी/ओबीसी वर्ग के बच्चे।
2. ईडब्ल्यूएस बच्चे जिनका पारिवारिक वार्षिक इनकम 72 हजार से कम हो।
3.बीपीएल परिवार।
4.दिव्यांग बच्चे।
5.अनाथ बच्चे।
6. 3.5-7 वर्ष(31 मार्च, 2026 तक)उम्र तक के बच्चे।
7. स्कूल से दूरी शहर में एक व ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकत तीन किलोमीटर।
आवश्यक कागजात
क्या चाहिए कागजात
जाति, स्थानीय, आय, जन्मदिन प्रमाण पत्र, आधार काब, पासपोर्ट साइज फोटो, बीपीएल कार्ड(राशनकार्ड), दिव्यांगता प्रमाणपत्र, जियो-टेगिंग फोटो।
मुफ़्त पढ़ाई की सुविधा
कक्षा आठ तक मुफ़्त पढ़ाई की सुविधा
बताते चलें कि झारखंड में आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों को प्रवेश स्तर पर 25% सीटों पर निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार मिलता है। इसमें कक्षा 8 तक मुफ्त पढ़ाई, किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शिक्षण सामग्रियां शामिल हैं। साथ ही बच्चों को बिना किसी भेदभाव के समान सुविधाएं मिलती है।
पदाधिकारियों की राय
क्या कहते हैं पदाधिकारी
जिला शिक्षा अधीक्षक मुकुल राज ने कहा कि अभी वे व्यस्त हैं। अगले सप्ताह तक बची सीटों पर नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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