
सम्मेदशिखर मधुबन में कोठियों और धर्मशालाओं का तेजी से विस्तार
पीरटांड़ की मधुबन में जैन धर्म के तीर्थंकरों की निर्वाणभूमि सम्मेदशिखर का तेजी से विकास हो रहा है। नए अत्याधुनिक होटल और धर्मशालाएँ बन रही हैं। पहले तीर्थयात्रियों को सीमित सुविधाएँ मिलती थीं, लेकिन अब वातानुकूलित कमरे और सुंदर गगनचुंबी जिनालयों के साथ कई सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
पीरटांड़। जैन धर्म के चौबीस में से बीस तीर्थंकरों की निर्वाणभूमि सम्मेदशिखर पारसनाथ की धरती मधुबन का तेजी से विस्तार हो रहा है। मंदिर व धर्मशालाओं की नगरी मधुबन में लगातार अत्याधुनिक होटल व गगनचुंबी जिनालय निर्माण का सिलसिला अनवरत चल रहा है। अत्याधुनिक व सुसज्जित धर्मशाला आकर्षण का केंद्र बन रहा है। उल्लेखनीय है कि पुराने जमाने में सम्मेदशिखर की यात्रा पर आनेवाले श्रद्धालुओं को कुछ खास व्यवस्था नहीं मिल पाती थी। धर्मशाला के नाम पर मधुबन में सड़क किनारे महज तीन कोठियां उपलब्ध थी। पर्वत की यात्रा पर आनेवाले तीर्थयत्रियों को तीन कोठियों में ही आश्रय मिलता था। सड़क किनारे स्थित पहली कोठी यानी तेरहपंथी कोठी, बिचली कोठी यानी जैन श्वेताम्बर सोसाइटी तथा उपरैली कोठी के रूप में बीसपंथी कोठी में तीर्थयात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन व ठहरने की व्यवस्था थी।
उस वक्त मधुबन में बाजार के नाम पर चाय नास्ते अथवा पान की दुकानें थी। मधुबन में वीआइपी ट्रीटमेंट के नाम पर व्यवस्था जीरो थी। पर बदलते वक्त के साथ मधुबन में तमाम अत्याधुनिक सुविधायुक्त धर्मशाला होटल व सजा-धजा मार्केट तीर्थयात्रियों का इंतज़ार करता है। बदलते वक्त के साथ तीर्थयात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए लगभग सभी धर्मशालाओं का स्वरूप बदल रहा है। पुराने भवन को तोड़कर वातानुकूलित कमरे का निर्माण हो चुका है। इन दिनों वातानुकूलित कमरे की मांग बढ़ गई है। तीर्थयात्रियों की पहली पसंद वातानुकूलित कमरा ही रहता है। समय की मांग के अनुरूप न केवल पुराने सभी तीन धर्मशालाओं में बदलाव हुआ है बल्कि मधुबन मुख्य मार्ग के अलावा चारों ओर सर्व सुविधायुक्त होटल व धर्मशाला का निर्माण युद्धस्तर पर हो रहा है। साथ ही मधुबन की विभिन्न धर्मशालाओं में संगमरमर पत्थर पर अद्भुत कलाकृतियों से सुशोभित गगनचुंबी जिनालय भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है। वर्तमान समय की बात करें तो मधुबन बाजार से लेकर धर्मशाला, होटल के क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है। मधुबन के पूर्वी क्षेत्र में धर्ममंगल जैन विद्यापीठ व अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कुंद कुंद कहान नगर तीर्थयात्रियों को तमाम सुविधा मुहैया करा रही है। वहीं पश्चिमी छोर में पारसनाथ पहाड़ के चरणों में स्थित भव्य तलेटी मंदिर मधुबन में चार चांद लगा रहा है। गिरिडीह डुमरी मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली सड़क उत्तरी छोर में सड़क किनारे अनगिनत होटल पर्यटकों को आश्रय दे रहा है। सड़क किनारे होटल व कॉटेज की लंबी कतार लग गई है। दक्षिणी छोर स्थित विशालकाय पारसनाथ पर्वत न केवल पर्यावरण समृद्धि प्रदान करती है, बल्कि देशभर में अहिंसा ओर शांति का संदेश दे रही है।

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