
झरना से ठंड में गरम और गर्मी में निकलता ठंडा पानी
तिसरी के गम्हरियाटांड़ में एक पहाड़ी से सालोंभर मीठा और स्वादिष्ट पानी निकलता है। गर्मियों में जब अन्य जल स्रोत सूख जाते हैं, तब भी यह झरना पानी देता है। लोग इसे देवी प्रभाव मानते हैं और दूर-दूर से यहाँ नहाने और पानी लेने आते हैं। इस झरने से निकली नदी ग्रामीणों के लिए लाभकारी है।
तिसरी। कहते हैं कि जहां विज्ञान की व्याख्या कुंद हो जाती है, वहीं से देव प्रभावों की चर्चा शरू होती है। कुछ इसी सिद्धांत पर एक अजीब सा नजारा देखने को मिलता है तिसरी के गम्हरियाटांड़ के एक छोटी सी पहाड़ी पर। यह पहाड़ी तिसरी के गम्हरियाटांड़ के उतरी छोर पर है। लगभग पचास मीटर वाली इस पहाड़ी के नीचे से सालों भर एक रफ्तार में मीठा और स्वादिष्ट पानी निकलता है। जहां अप्रैल और मई का महीना आते ही प्रचंड गर्मीं से पूरे प्रखंड के अधिकतर गांवों के कुएं, चापाकल, तालाब व नदी-नाले सूख जाते हैं वहीं इस झरना से सालोंभर एक जैसा एक रफ्तार में पानी निकलता रहता है।
यही कराण है कि लोग इसे देवी प्रभाव मानते हैं क्योंकि जमीन के सैकड़ों फीट नीचे चापानल के पाइप में जहां पानी नहीं मिलता है वहीं सुखी पहाड़ी के नीचे से जलस्रोत कायम है। लिहाजा स्वादिष्ट पानी रहने के कारण दूर-दूर के लोग झरने के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं। तिसरी के इस प्राचीन झरने के पानी में गजब की मिठास और खासियत है। इस झरने से सालोंभर एक ही गति से पानी निकलता रहता है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि झरने से गर्मी में ठंडा पानी निकलता है और ठंड में गरम पानी निकलता है। जो लोगों को काफी भाता व लुभाता है। झरने में हमेशा लोगों का हुजूम उमड़ा रहता है। यहां दूर-दूर से लोग नहाने के लिए आते हैं। वहीं आसपास गांवों के ग्रामीण झरने के पानी से ही अपनी प्यास बुझाते हैं। उक्त झरने से नदी भी निकली है जो तिसरी मुख्यालय स्थित पुल होते हुए गुजरती है और आगे जाकर गुमगी की सकरी नदी में मिल जाती है। इस नदी से गांव के ग्रामीण काफी लाभान्वित होते हैं।

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