
कमेंट्री सुनाने में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं जमुआ के शमीम
मो शमीम आलम, जो जमुआ के खरगडीहा निवासी हैं, ने कई वर्षों से खेलों की कमेंट्री की है। उन्होंने हाल ही में झारखंड सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। 2011 से डीडी स्पोर्ट्स के लिए कमेंट्री कर रहे शमीम ने राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है।
शुभम सौरभ जमुआ। कई सालों से खेलों का आंखों देखा हाल सुनाते आ रहे हैं जमुआ के मो शमीम आलम। जमुआ प्रखंड के खरगडीहा निवासी सह सेवानिवृत सीसीएल अधिकारी मो शमीम आलम देश और दुनिया में कमेंट्री कर नाम कमा रहे हैं। वह अपने राज्य और जिला का नाम रौशन कर रहे हैं। विदित हो कि मो शमीम आलम का जन्म खरगडीहा निवासी अब्दुल लतीफ के घर 23 सितंबर 1958 को हुआ। बचपन से ही राष्ट्रीय स्तर पर कमेंट्री करने की उनकी चाह थी, जो अब पूरी हो गई। विदित हो मो शमीम आलम ने 1975 में मैट्रिक और 1977 में इंटर की है, वह बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज थे।

फिर उन्होंने इंजीनियरिंग किया। वह कोल इंडिया में माइनिंग मैनेजर के पद से 2018 में रिटायर हुए हैं। झारखंड सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में कमेंट्री का मिला मौका : हाल ही में मो शमीम आलम को डी डी स्पोर्ट्स ने चार कमेंटेटर के पैनल में चौथी सैफ झारखंड सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में मौका दिया। रांची में 24 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक हुए खेल में मो शमीम का कमेंट्री का मौका दिया गया। जहां उन्होंने बखूबी बेहतरीन कमेंट्री कर दर्शकों का दिल जीत लिया। वह 2011 से डीडी स्पोर्ट्स के लिए कमेंट्री कर रहे हैं। इस प्रतियोगिता में भारत, भूटान, मालदीप, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका सहित छह देशों की प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। कमेंट्री कर काफ़ी नाम और शोहरत कमाई : मो शमीम आलम राष्ट्रीय खेल में कमेंट्री कर चुके हैं। 2015 में केरल में आयोजित 35वें राष्ट्रीय खेल के लिए देश भर से कुल 52 कमेंटेटरों का चयन हुआ था। जिसमें झारखंड से एक मात्र कमेंटेटर मो शमीम का चयन हुआ था। जानकारी के मुताबिक उस मैच में उन्होंने केरल में रह कर कमेंट्री की थी। इसके बाद इनका चयन गोवा में हुए 36 वें राष्ट्रीय खेल में भी हुआ था। बता दें कि मो शमीम ने अपनी कमेंट्री की शुरुआत गांव के एक छोटे फुटबॉल मैच से 1985 में की थी। इसके बाद गांव से प्रखंड, जिला, राज्य आदि में कमेंट्री करते-करते अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गए है। मो शमीम महान कमेंटेटर जसदेव सिंह को अपना आदर्श मानते हैं। 2011 में राष्ट्रीय खेल में डीडी स्पोर्ट्स के लिए हुआ था चयन : 1990 में शमीम आलम को रेडियो में कमेंट्री करने का पहला मौका मिला था। उस मौके को उन्होंने पूरी जवाबदेही के साथ निभाई। धनबाद कोयलांचल में शमीम की कमेंट्री करने का जादू छा गया। उसके बाद वर्ष 2010 में उनका तबादला पिपरवार एरिया में किया गया। वर्ष 2011 में उनकी आवाज सुन कर पहली बार उनका चयन 34वें राष्ट्रीय खेल में डीडी स्पोर्ट के लिए किया गया था।

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