आदिवासियों के आस्था का केंद्र मरांग बुरु पारसनाथ की देश भर में पहचान

Feb 15, 2026 01:46 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गिरडीह
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पीरटांड़ में मरांग बुरु पारसनाथ आदिवासियों का आस्था का केंद्र बन रहा है। दिशोम मांझी थान की पूजा अर्चना के साथ-साथ बाहा पर्व को लेकर धार्मिक स्थल का कायाकल्प किया जा रहा है। राजनीतिक नेताओं की भी यहां उपस्थिति रहती है, जो आदिवासियों की आस्था को और मजबूत करती है।

आदिवासियों के आस्था का केंद्र मरांग बुरु पारसनाथ की देश भर में पहचान

पीरटांड़। आदिवासियों का आस्था का केंद्र मरांग बुरु पारसनाथ की देश भर में पहचान बन रही है। आदिवासी परंपरा अनुसार दिशोम मांझी थान व जुग जाहेर की पूजा पाठ होती है। दिशोम मांझी थान के प्रति बढ़ती आस्था के साथ पूजनीय स्थल का कायाकल्प भी हो रहा है। बाहा पर्व को लेकर दिशोम मांझी को आकर्षक रूप सजाया जा रहा है। प्रकृति के पुजारी क्षेत्र के आदिवासी के साथ राजनीतिक दल के भी शीर्ष नेता भी समय समय पर दिशोम मांझी में दर्शन वंदन को पहुंचते हैं। बतला दें कि मरांग बुरु पारसनाथ न केवल जैन अनुयाइयों के लिए सबसे बड़ा तीर्थस्थल है बल्कि आदिवासियों के लिए भी आस्था का केंद्र है।

जैन धर्म के चौबीस में से बीस तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि मरांग बुरु पारसनाथ आदिवासियों के लिए भी पूजनीय स्थल माना जाता है। एक ओर जहां जैन धर्मावलंबी निर्वाण भूमि स्थित विभिन्न टोंक की वंदना करते हैं वहीं प्रकृति के पुजारी मरांग बुरु के रूप में पहाड़ व जंगल की पूजा करते हैं। मरांग बुरु मतलब बड़ा पहाड़ के प्रति न केवल क्षेत्र के आदिवासियों की आस्था है बल्कि राजनीतिक दल के आदिवासी नेता भी मरांग बुरु में शीश झुकाते हैं। मरांग बुरु पारसनाथ पर एक ओर जहां आदिवासी जुग जाहेर थान की पूजा अर्चना करते हैं वहीं पहाड़ तलहटी स्थित दिशोम मांझी थान के प्रति भी गहरी आस्था है। यही वजह है कि पहाड़ की तलहटी में स्थित मांझी थान की धीरे धीरे तस्वीर बदल रही है। आदिवासियों की बढ़ती आस्था के साथ धर्म स्थल का कायाकल्प भी हो रहा है। पहले दौर में प्रतीक चिन्ह के रूप में स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती थी। प्रकृति पर्व बाहा पर्व में विशेष आयोजन पूजा पाठ किया जाता था। बाहा पर्व को लेकर विशेष रूप से सजाया संवारा जा रहा है। साफ सफाई के साथ सुलभ आवागमन की भी व्यवस्था की जा रही है। कार्यक्रम को लेकर आदिवासी संगठन के अलावा प्रशासन के द्वारा रोज तैयारी का जायजा लिया जा रहा है। अब धीरे धीरे दिशोम मांझी थान की पहचान बन रही है। आदिवासियों का पूजा स्थल प्रतीक चिन्ह से बदलकर दिशोम मांझी थान को पूजनीय स्थल के रूप में चिन्हित कर आकृति दे दी गई है। दिशोम मांझी थान तक पीसीसी सड़क के साथ अब पूजा स्थल पर शेड निर्माण भी हो चुका है। बाहा पर्व को कमेटी द्वारा युद्धस्तर पर तैयारी की जा रही है। प्रशासन द्वारा रोज तैयारियों का जायजा भी लिया जा रहा है। बाहा पर्व के मौके पर मुख्यमंत्री के संभावित कार्यक्रम को लेकर प्रशासन विशेष सतर्क है। राजनेता भी टेकते रहे हैं मत्था मरांग बुरु पारसनाथ से न केवल स्थानीय आदिवासियों की आस्था है बल्कि राजनीतिक दल के शीर्ष नेता भी यहां शीश झुकाने आते हैं। कुछ वर्ष पहले भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने पूजा अर्चना कर दिशोम मांझी थान पूजा स्थल निर्माण की आधारशिला रखी थी। बाद में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मांझीथान में पूजा अर्चना कर राज्य के लिए सुख शांति की दुआ मांगी थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मरांग बुरु स्थित दिशोम मांझीथान में पूजा अर्चना कर चुके हैं। साथ ही झामुमो के शीर्ष नेत्री कल्पना सोरेन ने भी गिरिडीह के कार्यक्रम से पहले दिशोम मांझी थान में पूजा अर्चना कर राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। इस वर्ष भी बाहा पर्व के मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। मुख्यमंत्री के संभावित कार्यक्रम को लेकर समाज के लोगों में खासा उत्साह है।

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