झामुमो और कांग्रेस ईमानदारी से हार की जिम्मेवारी ले: राजकुमार यादव
धनवार के पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने महागठबंधन की हार की जिम्मेदारी लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि झारखंड में छोटे दलों को बदनाम करना सही नहीं है। यादव ने चुनाव परिणाम को संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की और कहा कि कांग्रेस को अपने बयान वापस लेना चाहिए।

गिरिडीह, प्रतिनिधि। धनवार के पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने कहा कि महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल रहने के बावजूद भी प्रणव झा को मात्र 19 वोट प्राप्त होना और हार जाना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के मुख्य दल झामुमो और कांग्रेस को ईमानदारी से हार की जिम्मेवारी लेनी चाहिए। छोटे दलों पर आरोप लगाकर अपनी हार का ठीकरा फोड़ना कहीं से सही नहीं है।
हार की जिम्मेदारी
पूर्व विधायक यादव ने कहा कि जब 28-28 मत से दोनों उम्मीदवार की जीत होती तो उस हालत में झामुमो के उम्मीदवार को 30 से अधिक मत मिलना और तीन वोट रद्द होना संदेह पैदा करता है। इसकी सभी दलों को जांच करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमेशा बड़े दलों के उम्मीदवारों की हार होने के बाद छोटे दलों को बदनाम करके और उनकी साख को गिराने की साजिश की जाती है, जो सही नहीं है।
भाकपा माले की भूमिका
बिहार में भाकपा माले ने कांग्रेस के उम्मीदवार अखिलेश सिंह को जिताने का काम किया। अभी हाल के चुनाव में बिहार में राजद के उम्मीदवार को हराने का काम कांग्रेस के एक विधायक ने किया था। उस समय भी भाकपा माले ने ईमानदारी से वोट डाला। महागठबंधन अति आत्म विश्वास के कारण भी हारा है।
कांग्रेस की रणनीति
झारखंड में छोटे दलों के विधायकों और स्वयं अपने पार्टी के विधायकों और सभी पार्टी के नेताओं से विचार विमर्श नहीं करके और अपने मन से कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार देना भी हार का मुख्य कारण है। कहा कि एक थैलीशाह को भाजपा ने उम्मीदवार बनाकर साफ संकेत दे दिया है कि झारखंड में भी लोट्स ऑपरेशन किया जा सकता है। कहा कि 2018 में भी कांग्रेस ने यही खेल खेला था और पार्टी को बदनाम किया था। कहा कि कांग्रेस अपने बयान को वापस ले। भाकपा माले इस बयान की कड़ी निंदा करती है।
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