आस्था की अनुगूंज और विकास की दरकार

Feb 13, 2026 03:23 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गिरडीह
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झारखंडधाम एक पवित्र तीर्थ स्थल है जो दक्षिणवाहिनी इरगा नदी के किनारे स्थित है। यह स्थल आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम है। यहां शिवलिंग की पूजा की परंपरा चार शताब्दी पुरानी है। श्रद्धालुओं की भीड़ विशेष त्योहारों पर उमड़ती है। प्रशासन से बेहतर सुविधाओं की मांग है ताकि यह स्थल पर्यटन का केंद्र बन सके।

आस्था की अनुगूंज और विकास की दरकार

झारखंडधाम। दक्षिणवाहिनी इरगा नदी की कलकल ध्वनि और हरित वादियों की गोद में अवस्थित झारखंडधाम आज आस्था, इतिहास और लोक विश्वास का अद्भुत संगम बन चुका है। जमुआ प्रखंड की सीमा पर स्थित यह पावन तीर्थ हीरोडीह थाना क्षेत्र में पड़ता है तथा धनवार और परसन थाना की सरहद को स्पर्श करता है। तीन-तीन थाना क्षेत्रों की सतर्क निगाहों के कारण यहां सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था रहती है, जिससे श्रद्धालु दिन हो या रात, निर्भीक होकर पहुंचते हैं। विवाह-मौसम, पूर्णिमा अथवा पर्व-त्योहारों पर तो यहां श्रद्धा की अविरल धारा उमड़ पड़ती है। लोककथाओं के अनुसार लगभग चार शताब्दी पूर्व झारखंडी नामक एक चरवाहे ने शिवलिंग को साधारण पत्थर समझ कुल्हाड़ी साननी चाही, किंतु उससे रक्त प्रवाहित होते देख वह स्तब्ध रह गया।

यहीं से पूजा-अर्चना की परंपरा प्रारंभ हुई। किंवदंतियां बताती हैं कि लंकाधिपति रावण ने यहां तप कर शिवलिंग स्थापित किया था और महाभारत काल में अर्जुन ने भी पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति हेतु साधना की। मुख्य मंदिर का छतविहीन स्वरूप और एक ही परिसर में दो शिवलिंगों की उपस्थिति आज भी रहस्य और श्रद्धा का केंद्र है। श्रावण मास, महाशिवरात्रि, दुर्गा पूजा और प्रत्येक पूर्णिमा पर यहां श्रद्धालुओं की रेलमपेल भीड़ उमड़ती है। भक्त शिवगंगा में आस्था की डुबकी लगाकर चंद्रकूप से जल भरते हैं और भोलेनाथ को अर्पित करते हैं। असाध्य रोगों से पीड़ित लोग भी यहां सेवा-सफाई और साधना में लीन होकर कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। इतिहास साक्षी है कि धनवार के राजा और किसगो के तत्कालीन टिकैत ने 14 एकड़ भूमि दान में दी थी, किंतु समय के साथ अतिक्रमण और अव्यवस्था ने इस धरोहर को चुनौती दी है। स्थायी बैरिकेडिंग, कंट्रोल रूम, चिकित्सा केंद्र, पार्किंग, शौचालय, पेयजल और समुचित प्रकाश व्यवस्था की दरकार स्पष्ट है। न्यास बोर्ड के अध्यक्ष बिनोद पंडा, सचिव मनोज पंडा निवर्तमान अध्यक्ष नरेश पंडा,पूर्व अध्यक्ष सुभाष पंडा के अलावे राजेंद्र, प्रदीप, सुजीत, महेंद्र, महेश, निधि पंडा सहित अन्य पदाधिकारियों ने महाशिवरात्रि मेले में बेहतर यात्री सुविधा का भरोसा दिलाया है। अब आवश्यकता है कि शासन-प्रशासन भी इस पौराणिक धाम के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की ठोस पहल करे, ताकि झारखंडधाम केवल आस्था का नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित पर्यटन का भी आलोकित प्रतीक बन सके।

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