एसडीएम के आदेश को भी नहीं मिली तवज्जो, तिसरी सीओ पर जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप
खोरीमहुआ अनुमंडल क्षेत्र के तिसरी अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। एसडीएम के निर्देशों के बावजूद जांच प्रतिवेदन अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। गणेश यादव ने अवैध कब्जे और जान से मारने की धमकी के संबंध में आवेदन दिया था। स्थानीय लोग प्रशासनिक लापरवाही की बात कर रहे हैं।

खोरीमहुआ, प्रतिनिधि। खोरीमहुआ अनुमंडल क्षेत्र के तिसरी अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
जांच प्रतिवेदन की अनुपस्थिति
अनुमंडल दंडाधिकारी (एसडीएम) द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद तिसरी अंचल कार्यालय से अब तक जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया है। मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 से जुड़ा है, जिसमें त्वरित जांच कर प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया गया था।
गणेश यादव का आवेदन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तिसरी थाना क्षेत्र के मंझलाडीह निवासी गणेश यादव ने अपनी केवाला जमीन पर जबरन कब्जा, खेत जोतने तथा परिवार को जान से मारने की धमकी देने संबंधी आवेदन प्रशासन को दिया था। आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों द्वारा उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है तथा विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही है।
एसडीएम का पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए खोरीमहुआ अनुमंडल दंडाधिकारी ने 29 दिसंबर 2025 को तिसरी थाना प्रभारी एवं तिसरी अंचल अधिकारी को पत्र जारी कर स्थल जांच, राजस्व अभिलेखों की जांच तथा स्पष्ट अनुशंसा के साथ विस्तृत प्रतिवेदन न्यायालय में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। एसडीएम कार्यालय से जारी पत्र में साफ कहा गया था कि भूमि की प्रकृति, खाता-प्लॉट से संबंधित कागजात और स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सके। लेकिन हैरानी की बात यह है कि करीब चार माह बीत जाने के बाद भी अंचल कार्यालय द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया।
स्थानीय लोगों की चिंताएं
इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि पीड़ित परिवार भी लगातार असुरक्षा और मानसिक दबाव में जीवन जीने को मजबूर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब एसडीएम के स्पष्ट आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है, तो आम जनता की शिकायतों पर प्रशासन कितना गंभीर होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। लोगों ने तिसरी अंचल कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने का मामला बताया है। ग्रामीणों और सामाजिक लोगों ने वरीय अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि यदि समय रहते रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, तो पीड़ित को न्याय मिलने में और देरी हो सकती है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर एसडीएम के आदेश की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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