जिले के 125 गांवों और कस्बों में घूमा बाल विवाह मुक्ति रथ
भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्ति रथ ने 650 किलोमीटर की यात्रा की और 125 गांवों में पहुंचकर 153534 लोगों को जागरूक किया। यह अभियान बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और कानूनी पहलुओं के दुष्परिणामों पर ध्यान केंद्रित करता है।

बगोदर, प्रतिनिधि। भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चले 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्ति रथ जिले के गांवों एवं कस्बों में भ्रमण किया। इस दौरान बाल विवाह के खिलाफ लोगों को जागरूक किया गया। बाल विवाह मुक्ति रथ यात्रा के समापन के अवसर पर रविवार को आयोजित कार्यक्रम में बनवासी विकास आश्रम के निदेशक सुरेश कुमार शक्ति ने कहा कि अभियान के प्रयासों को मिली प्रतिक्रिया से हम आश्वस्त हैं कि बाल विवाह मुक्त गिरिडीह और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के बेहद करीब हैं। बनवासी विकास आश्रम बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जमीन पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा नागरिक व देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है।
बताया कि 30 दिनों में बाल विवाह मुक्ति रथ ने जिले में 650 किलोमीटर की यात्रा की है। यह रथ 125 गांवों तक पहुंचा और लगभग 153534 लोगों को बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ा गया है। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के सालभर पूरा होने के अवसर पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चार दिसंबर 2025 को देशव्यापी 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान का एलान किया था। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान के मोर्चे से अगुआई करते हुए देश के 439 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने के लिए बाल विवाह मुक्ति रथ निकाले गए। इस रथ ने जिले के तमाम गांवों और कस्बों में घूम-घूमकर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका पर दुष्परिणामों से अवगत कराया और इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है। संपर्क के लिहाज से मुश्किल सुदूर गांवों तक मोटरसाइकिल व साइकिल कारवां के जरिए पहुंचा गया ताकि बाल विवाह मुक्त गिरिडीह का संदेश सबसे आखिरी छोर तक पहुंच सके। बताया कि तीन चरणों में चले इस अभियान के पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों व दूसरे चरण में धर्मगुरुओं को जोड़ा गया और उनसे अनुरोध किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व आयु की जांच कर लें और बाल विवाह संपन्न कराने से इनकार करें। साथ ही, कैटरर्स, सजावट वालों, बैंक्वेट हाल मालिकों व विवाह में सेवाएं देने वाले बैंड वालों, घोड़ी वालों से संपर्क कर अनुरोध किया गया कि वे बाल विवाह में अपनी सेवाएं नहीं दें क्योंकि बाल विवाह में किसी भी रूप में शामिल होने या सहयोग देने पर उन्हें सजा हो सकती है। तीसरे चरण में जिले की पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया गया।
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