
हज़ारीबाग रोड स्टेशन के ठेकेदार की मनमानी से यात्री परेशान
संक्षेप: हज़ारीबाग रोड रेलवे स्टेशन की स्थिति खराब है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। 28 करोड़ रुपये की लागत से वेटिंग रूम का निर्माण हुआ, लेकिन वे अब तक बंद हैं। यात्रियों में गुस्सा और निराशा है, और यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
सरिया, प्रतिनिधि। हज़ारीबाग रोड रेलवे स्टेशन की बदहाल स्थिति और ठेकेदार की मनमानी एक बार फिर सुर्खियों में है। स्टेशन परिसर में यात्री सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, अमृत भारत योजना के तहत करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से स्टेशन परिसर में कई विकासात्मक कार्य कराए गए हैं, जिनमें प्लेटफॉर्म संख्या 1 और 2 पर 05 वेटिंग रुम है जिसमें 02 फर्स्ट व 02 सेकेंड क्लास यात्रियों के लिए और 01 रेल स्टाफ रुम का निर्माण शामिल है। निर्माण को तीन माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इन कमरों पर ताला लटका हुआ है।

रेल सूत्रों का कहना है कि ठेकेदार की मनमानी और रेल विभाग की आपसी खींचतान के कारण ये वेटिंग रूम अब तक चालू नहीं किए गए हैं। परिणामस्वरूप यात्रियों को दिन-रात प्लेटफॉर्म की जमीन पर बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल यात्रियों को असुविधा हो रही है बल्कि स्टेशन की बदइंतजामी भी उजागर हो रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि स्टेशन पर पहले से ही शौचालयों में ताले लगा रहना, पीने के पानी की कमी और अधूरे यात्री शेड जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। बावजूद इसके, संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हुए हैं। रेल यात्री संघ के अध्यक्ष राजू मंडल ने कहा कि यदि जल्द ही वेटिंग रूम का ताला नहीं खोला गया, तो यात्रियों के साथ मिलकर ठेकेदार के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल यात्रियों में गुस्सा और निराशा दोनों है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक उन्हें जमीन पर बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ेगा?

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