रुक्मिणी विवाहोत्सव पर निकाली गई शोभा यात्रा
बेंगाबाद में खुरचुट्टा दुर्गा मंदिर परिसर से रुक्मिणी विवाहोत्सव पर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने इस यात्रा में भाग लिया, जो पूरे नगर में घूमी। कथा वाचक ने रुक्मिणी और भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम और साहस की कहानी सुनाई। रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण से विवाह किया, जो प्रेम और स्वतंत्रता का प्रतीक है।

बेंगाबाद। खुरचुट्टा दुर्गा मंदिर परिसर से शुक्रवार देर रात रुक्मिणी विवाहोत्सव पर बाजे गाजे के साथ भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा में श्रद्धालुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। आकर्षक झांकी के साथ निकाली गई शोभा यात्रा ने पूरे नगर का भ्रमण किया। शोभा यात्रा वापस लौटने के बाद यज्ञ स्थल पर विधिवत श्री कृष्ण रुक्मिणी विवाहोत्सव की रस्म पूरी की गई। मौके पर कथा वाचक ने कहा कि रुक्मिणी विवाहोत्सव भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रेम, साहस और स्त्री की स्वतंत्र इच्छा का प्रतीक माना जाता है। इस प्रसंग में कथा वाचक ने कहा कि रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं।
रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण से प्रेम करती थी, लेकिन रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने इसका विरोध किया और उसका विवाह शिशुपाल से कराने का फैसला किया। रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को एक पत्र लिखकर अपनी स्थिति बताई और उन्हें अपनी रक्षा करने के लिए कहा। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया और उसे द्वारका ले जाकर विवाह किया। कहा कि रुक्मिणी विवाहोत्सव प्रेम, साहस का प्रतीक है। श्री कृष्ण रुक्मिणी विवाह का प्रसंग श्रवण से महिला श्रद्धालु भाव विभोर थी।
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