मां मथुरासिनी पूजा को लेकर निकाली गई शोभा यात्रा
ताराटांड़ के भंडारीडीह में मां मथुरासिनी के तीन दिवसीय पूजनोत्सव की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे के साथ पूजा स्थल से भ्रमण करते हुए बड़की नदी पहुंचे। वहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की गई। पूजा समिति ने श्रद्धा और भक्ति के साथ वार्षिक आयोजन का संचालन किया।

ताराटांड़, प्रतिनिधि। ताराटांड़ के भंडारीडीह में तीन दिवसीय मां मथुरासिनी पूजनोत्सव को लेकर बुधवार को गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा में जहानाबाद के पंडित अखिलेश पांडेय, मुख्य यजमान विरेन्द्र राम एवं उषा देवी की अगुवाई में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल थे। शामिल महिलाएं व पुरुष पूजा स्थल से मोहलीडीह क्षेत्र भ्रमण करते हुए बड़की नदी पहुंचे। जहां पर पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद कलश में जल भरवाया। इसके बाद उसी रास्ते से वापस शोभा यात्रा पूजा स्थल पहुंचा। शोभा यात्रा के दौरान श्रदालु महिलाएं कतारबद्ध होकर मां मथुरासिनी देवी के जयकारे के साथ चल रही थी।
इससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया था। पूजा स्थल पर मां मथुरासिनी देवी की पूजा-अर्चना की शुरुआत की गयी। पूजा समिति के अध्यक्ष सोनु कुमार गुप्ता ने बताया प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ वार्षिक पूजनोत्सव मनाया जा रहा है। मौके पर पूजा समिति के सचिव राहुल कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष मनीष गुप्ता, सक्रिय सदस्य अनिल राम, राजकुमार राम, बिनोद राम, अजित गुप्ता, शिवशंकर राम, राजेन्द्र राम, विजय राम, सुजीत राम, अजय राम, मनोज राम, अभिषेक गुप्ता, शुभम गुप्ता, सुनील गुप्ता, पप्पू गुप्ता, परमानंद राम, नरेश राम, रवि गुप्ता, संतोष राम, पंकज गुप्ता, पवन राम समेत सैकड़ों लोग उपस्थित थे।गाजे-बाजे के साथ निकाली गई कलश यात्राराजधनवार, प्रतिनिधि। मां मथुरासिनी पूजा को लेकर माहुरी मंडल राजधनवार के द्वारा बुधवार को गाजे -बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में समाज की महिला, पुरूष व बच्चे पूरे उत्साह के साथ माता का जयकारा लगाते हुए चल रहे थे। यह कलश यात्रा राजधनवार तोड़ो राम धर्मशाला प्रांगण से निकली और पूरे बाजार का भ्रमण करते हुए राजघाट राजा नदी पहुंची। जहां पंडितों ने विधि-विधान पूर्वक पूजा-पाठ कराके कलश में जल भरवाया। कलश में जल भरने के बाद श्रद्धालु कलश लेकर पूजा स्थल तोड़ो राम धर्मशाला पहुंचे। यहां पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कलश स्थापित करवाया। कलश स्थापन के साथ ही मां मथुरासिनी की पूजा प्रारंभ हो गई।
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