
40 करोड़ से बनेंगे 71 हेल्थ सब सेंटर, हर निर्माण पर 55.50 लाख खर्च
संक्षेप: गिरिडीह में सरकार और जिला प्रशासन 71 नए हेल्थ सब सेंटर बनाने जा रहे हैं। यह कदम ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए है। निर्माण प्रक्रिया 24 नवंबर से शुरू होगी और सभी सेंटर 9 महीने में बनकर तैयार होंगे। कुल लागत 39 करोड़ 40 लाख 50 हजार होगी।
गिरिडीह। जिले के अंतिम व्यक्ति तक को स्वास्थ्य की सेवाएं घर के पास ही मिले। इसी सोच के साथ सरकार और जिला प्रशासन 71 नए हेल्थ सब सेंटर जिलेभर में बनाने जा रही है। इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरु हो गई। वेबसाइट में निविदा प्रकाशन की तिथि 24 नवम्बर को मुकर्रर है। निविदा प्राप्ति की तिथि इसी 24 नवम्बर से 06 दिसम्बर तक निश्चित है। ई-निविदा 08 दिसम्बर को जिला अभियंता, जिला परिषद के कार्यालय में खोले जाएंगे। सभी 71 हेल्थ सब सेंटर 9 माह में बनकर तैयार भी हो जाएंगे। सभी सेंटरों पर खर्च होंगे 40 करोड़: जिलेभर में कुल 71 नए हेल्थ सब सेंटर बनाए जाएंगे।

जिसकी कुल लागत 39 करोड़ 40 लाख 50 हजार है। विभाग की माने तो हरेक सेंटर के निर्माण पर 55.50 लाख खर्च होंगे। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी है, ताकि छोटे-मोटे इलाज के लिए लोगों को दूर न जाना पड़े। यह कदम 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर उठाया गया है। सबसे अधिक 16 सेंटर बिरनी में: गावां प्रखंड में 02 हेल्थ सब सेंटर का निर्माण पटना और नगवां में होगा। सबसे अधिक 16 सब सेंटर बिरनी प्रखंड में बनेंगे। इनमें कपिलो, दलंगी, माखमरगो, बिरनी, अरारी, तेतरिया, केन्दुआ, जरीडीह, मंझिलाडीह, बाराडीह, कुसमई, तुलसीटांड़, गादी, चोंगाखार, पडरमनिया और केशोडीह है। इसी तरह देवरी में 12, बेंगाबाद व सरिया में 09-09, जमुआ में 07, बगोदर में 06 और देवरी व गांडेय में 05-05 नए हेल्थ सेंटर बनेंगे। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। हेल्थ सब सेंटर खुलने से क्या लाभ: घर के पास इलाज: बुखार, सर्दी-जुकाम, दस्त, चोट जैसी सामान्य बीमारियों का इलाज अब गांव में ही संभव होगा। मातृ एवं शिशु देखभाल: गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, दवा, पोषण सलाह और बच्चों का टीकाकरण यहां उपलब्ध रहेगा। किशोरियों के लिए विशेष सुविधा: माहवारी स्वच्छता, पोषण, व्यक्तिगत परामर्श से ग्रामीण किशोरियों को जागरुक किया जा सकेगा। बीमारियों की पहचान और रोकथाम: मलेरिया, डेंगू जैसी मौसमी बीमारियों की शुरुआती पहचान और उपचार से बड़ा फर्क पड़ेगा। सरकारी योजनाओं का लाभ: आयुष्मान भारत, मिशन इंद्रधनुष जैसी योजनाओं का लाभ सीधे गांव में मिलने लगेगा।

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