ल्टर होम्स में नहीं पहुंचते बेघर, हमेशा रहता है बंद
गिरिडीह नगर निगम ने गरीब और बेघर लोगों के लिए शेल्टर होम्स बनाने का दावा किया है, लेकिन सर्दी में लोग खुले आसमान के नीचे सोते हैं। शेल्टर होम्स में केवल बेड और कंबल दिए जाते हैं, खाना नहीं मिलता। स्थानीय लोग निगम के दावों को झूठा बताते हैं और बताते हैं कि शेल्टर अक्सर बंद रहता है।

गिरिडीह, प्रतिनिधि। हाड़ कंपा रही सर्दी के मौसम में गरीब, बेघर और बेसहारा लोगों को राहत देने के लिए गिरिडीह नगर निगम ने सिटी लाईवली हूड सेंटर को शेल्टर होम्स बनाया है, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि शेल्टर होम्स में रात नहीं बिता कर गरीब और बेघर खुले आसमान के नीचे अथवा सड़क किनारे सोते दिखाई दे रहे हैं, जो व्यवस्था और व्यवहार के बीच मौजूद खाई को उजागर करता है। हालांकि शेल्टर होम्स में गरीब-बेघरों को ठहरने पर बेड, चादर और कंबल ही मिलता है। खाने-पीने की व्यवस्था नहीं रहती है। मंगलवार को आपके अपने दैनिक अखबार हिन्दुस्तान ने जब पड़ताल की तो शेल्टर होम्स का मुख्य गेट बंद मिला।
खिड़की खुली थी, जिसके अंदर देखने पर 9-10 बेड दिखे। कोई शख्स नहीं दिखा। हिन्दुस्तान की पड़ताल के दौरान आसपास के लोग आये। कहा कि यहां शेल्टर होम्स बंद रहता है, जबकि नगर निगम का दावा है कि अभी चार शख्स वहां रह रहे हैं, जिस दावे को स्थानीय लोग झूठा बताए। शेल्टर होम्स का संचालन निगम स्वयं कर रही है। फिलहाल यहां 25 बेड की व्यवस्था है। कोई भी शख्स यहां ठहरता है तो उसे खाना नहीं मिलता है। निगम से सिर्फ ठहरने की व्यवस्था होती है। सर्दी में कंबल, गद्दे दिए जाते है। यह सब दावे निगम कर रही है, जबकि स्थानीय लोग निगम के इस दावे को गलत और झूठा बताते हैं। रिषभ जैन, प्रदीप सिंह, अभिषेक कुमार शर्मा और मो. फिरोज का कहना है कि शेल्टर होम में खाना तो दूर ठहरने की भी सही व्यवस्था नहीं है। यह हमेशा बंद रहता है। इस कारण भवन असामाजिक तत्वों के कब्जे में रहता है। निगम द्वारा इसके सुचारु संचालन पर ध्यान नहीं दिया जाता है। इधर पड़ताल के दौरान सड़क किनारे कई शख्स कतार से सोते दिखे।
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