लाभुकों के बीच ट्रैक्टर-बाइक व अन्य परिसंपत्तियों का वितरण

Feb 04, 2026 12:43 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गिरडीह
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गिरिडीह के पचम्बा मैदान में जिला स्तरीय किसान मेला सह फसल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को नई तकनीकों, जैविक खेती और विपणन रणनीतियों पर जोर दिया गया। उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि यह मेला किसानों के लिए लाभकारी है और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है।

लाभुकों के बीच ट्रैक्टर-बाइक व अन्य परिसंपत्तियों का वितरण

गिरिडीह, प्रतिनिधि। अनुमंडलीय कृषि प्रक्षेत्र पचम्बा मैदान में जिला स्तरीय किसान मेला सह फसल प्रदर्शनी कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को किया गया। जिसमें कई लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण किया गया। एक आजीविका को ट्रैक्टर की चाभी दी गयी। साथ ही 05 लाभुकों को मत्स्य विभाग द्वारा मोटरसाइकिल और आईसबॉक्स दिया गया। किसान मेले में कृषि एवं कृषि संबंधित विभाग के साथ कृषि विज्ञान केंद्र एफपीओ खाद बीज भंडार सहित कुल 18 स्टॉल लगाए गए थे। मेला का उद्घाटन मुख्य अतिथि उपायुक्त रामनिवास यादव, उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी, बीस सूत्री के जिला उपाध्यक्ष संजय सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित करके किया।

नयी तकनीकों से उन्नत खेती का अवसर प्रदान करेगा किसान मेला: डीसी कार्यक्रम में डीसी रामनिवास यादव ने कहा कि यह मेला किसानों के लिए नयी तकनीकों, जैविक खेती, उद्यानिकी और मत्स्य पालन में उन्नति का अवसर प्रदान करेगा। मेले में किसानों को उनकी उपज का मूल्य बढ़ाने, विपणन रणनीतियों और पर्यावरण अनुकूल खेती पर जोर दिया गया। डीसी ने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है। उपायुक्त ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर जायजा लिया तथा मेले में प्रदर्शित कृषि उपकरण, तकनीकी नवाचार, जैविक उत्पादों, फसलों, फल, फूल और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। प्रदर्शनी में जैविक उत्पादों, स्थानीय सब्जियों और फलों की विभिन्न प्रजातियों का प्रदर्शन किया गया। किसानों की संख्या बढ़ाने की जरुरत है: डीडीसी डीडीसी स्मृता कुमारी ने कहा कि यह मेला किसानों के लिए बहुत लाभकारी है। अधिक प्रचार प्रसार करते हुए किसानों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। तकनीकी ढंग से खेती करने की सलाह को यदि किसान अपने छिड़काव की विधि एवं समय पर करें तो किसानों को अधिक लाभ होगा। पानी की कमी को देखते हुए खेती कार्य समय पर नहीं हो पाता है। विभाग को इसपर ध्यान देने की आवश्यकता है, जिससे सिंचाई सुनिश्चित हो सकें। इसके लिए चेक डैम, तालाब कूप जैसे योजना पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जिससे पानी संरक्षित कर खेती करने में सहायक हो सकता है। वैज्ञानिक तरीके से कम लागत में हो सकती है खेती: डीएओ डीएओ आशुतोष कुमार ने कहा कि किसान स्वावलंबी बने। किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती कर खेती की लागत को कम कर सकते हैं। जैसे बीज का चुनाव, बीज की मात्रा, समय पर सिंचाई, पौधे की दूरी, बीज उपचार रोगों में अनुशंसित दवाई का प्रयोग आदि अपनाते हुए किसान खेती की लागत को कम कर सकते हैं। साथ ही नीम, करंज, सरसों खली आदि का उपयोग करें। वैज्ञानिक विधि से खेती की विस्तृत जानकारी डीएओ द्वारा दी गई। मौके पर ये थे मौजूद मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी आशुतोष तिवारी, जिला उद्यान पदाधिकारी वरुण कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला गव्य विकास पदाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी समेत सभी संबंधित अधिकारी के अलावा जिले के सभी प्रखण्डों से काफी संख्या में किसान, किसान मित्र, प्रगत्तिशील कृषक उपस्थित थे।

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