देवघर एम्स में महज़ दस आईसीयू बेड, बड़ी संख्या में मरीज़ बाहर रेफ़र
सियाटांड़ में देवघर एम्स के स्वास्थ्य सेवा की स्थिति गंभीर है। आरटीआई कार्यकर्ता सुरेंद्र पांडेय की जांच में पता चला है कि अस्सी आईसीयू बेड में से सिर्फ दस चालू हैं, जबकि सीसीयू अभी तक शुरू नहीं हुई है। यह स्थिति झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल की क्षमता पर सवाल उठाती है।

सियाटांड़,प्रतिनिधि । राज्य के सबसे बड़े अस्पताल देवघर एम्स का स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा उपलब्ध कराने के मामले में बुरा हाल है। आरटीआई से मिले ज़बाब में अस्पताल का पोल खोल कर रख दिया है। गिरिडीह के आरटीआई कार्यकर्ता सुरेन्द्र पांडेय के आरटीआई से मिले ज़बाब में कई चौकाने वाले खुलासे हुए है। एम्स में जहां अस्सी आईसीयू बेड स्वीकृत है, वहीं वर्तमान में महज़ दस बेड चालू स्थिति में हैं। सीसीयू(कॉर्डियक केयर यूनिट)अब तक शुरू ही नहीं हुई है अर्थात पूरी तरह नन-ऑपरेशनल है। आईसीयू रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बाहर रेफर किया गया, जो झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल की क्षमता और व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
एम्स ने खर्च, परियोजना और संचालन से संबंधित कई सूचनाओं को नोट अवेलेबल बताते हुए साझा नहीं किया, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्न उठना लाजमी है। क्या कहते हैं आरटीआई कार्यकर्ता: आरटीआई कार्यकर्ता सुरेंद्र पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य जनता के जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। एम्स जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान में आईसीयू सीमित और सीसीयू बंद रहना चिंताजनक है। संबंधित प्राधिकारियों को इस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।

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