Gridih News: गिरिडीह 2 उवि में 2 हजार आर्ट्स छात्रों पर सिर्फ 3 शिक्षक
Gridih News: गिरिडीह के सरकारी विद्यालय 2 उवि में इंटर आर्ट्स की पढ़ाई बदहाल है। 2000 विद्यार्थियों के लिए केवल 3 शिक्षक हैं, जिससे कक्षाएं नहीं चल पा रही हैं। शिक्षा के लिए शिक्षकों की भारी कमी और हाल ही में बढ़े हुए नामांकन ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

Gridih News: अजय सिंह , गिरिडीह। मुख्य शहर में अवस्थित सरकारी विद्यालय गिरिडीह 2 उवि में इंटर आर्ट्स की पढ़ाई बदहाल है। यहां 11वीं और 12वीं में आर्ट्स संकाय में लगभग 2000 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन उनके लिए सिर्फ 3 शिक्षक पदस्थापित हैं। यानी एक शिक्षक पर करीब 700 विद्यार्थियों का भार। जबकि 30 छात्रों पर एक शिक्षक का मानक तय है। इस हिसाब से केवल आर्ट्स के लिए ही 66 से अधिक शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन विद्यालय में स्वीकृत पद और उपलब्ध शिक्षकों की संख्या इतनी कम है कि नियमित कक्षाएं तक नहीं चल पातीं। पहले इस स्कूल में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स की 128-128 सीटें निर्धारित थीं, लेकिन तीन-चार साल पहले एनईपी के प्रावधान के तहत डिग्री कॉलेजों से इंटर की पढ़ाई बंद कर दी गई। इससे आरके महिला कॉलेज और गिरिडीह कॉलेज के लगभग 2 हजार इंटर छात्रों का भार शहर के 2 स्कूलों पर आ गया। सर जेसी बोस बालिका 2 उवि और पचंबा उच्च विद्यालय को उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा मिलने के कारण वहां प्रवेश परीक्षा से सीमित सीटों पर नामांकन होता है। मकतपुर उवि में 10वीं तक की पढ़ाई होती है। ऐसे में शहर के बीच अवस्थित गिरिडीह 2 उवि पर दबाव सबसे ज्यादा बढ़ गया। विभाग का फरमान आया कि किसी भी छात्र को नामांकन से वंचित नहीं रखा जाएगा। इसके बाद यहां इंटर में नामांकन अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया। विद्यालय में 9वीं से 12वीं तक लगभग 4500 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इसमें 2500 छात्राएं शामिल हैं। इंटर आर्ट्स में 2000, साइंस में 400 और कॉमर्स में 100 छात्र नामांकित हैं। वहीं 9वीं व 10वीं में मिलाकर 1500 से अधिक बच्चे नामांकित हैं।
विषय हैं, पढ़ाने वाले नहीं
विद्यालय में पीजीटी शिक्षकों के लिए कुल 11 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 10 शिक्षक कार्यरत हैं। आर्ट्स में सिर्फ अर्थशास्त्र, भूगोल और हिंदी के शिक्षक हैं। इतिहास, राजनीति शास्त्र, मनोविज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए एक भी शिक्षक नहीं हैं। नतीजा यह कि इन विषयों की कक्षाएं अक्सर प्रभावित रहती हैं और छात्रों को सेल्फ स्टडी के भरोसे रहना पड़ता है। साइंस में 400 छात्रों के लिए शिक्षकों की संख्या पर्याप्त बताई जाती है। कॉमर्स में 100 छात्रों पर एक शिक्षक है। कॉमर्स के शिक्षक ही प्रभारी प्राचार्य हैं। सबसे बुरी स्थिति आर्ट्स की है। आर्ट्स में शिक्षकों की कमी का सबसे ज्यादा असर छात्राओं पर पड़ रहा है। कक्षाएं नहीं चलने और शिक्षकों के अभाव के कारण अभिभावक भी चिंतित हैं।
क्लास रुम मिला, शिक्षक नहीं
पहले यहां क्लास रुम की भी भारी कमी थी। डीसी रामनिवास यादव के प्रयास से विद्यालय में 10 नए कमरे बनने के बाद भवन की समस्या काफी हद तक दूर हुई है, लेकिन इंटर आर्ट्स में क्षमता से अधिक नामांकन होने के बाद शिक्षकों की कमी नई परेशानी बन गई है। स्थानीय शिक्षक और अभिभावकों का कहना है कि नामांकन बढ़ाने से पहले शिक्षकों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए थी। अभी जो स्थिति है उसमें 2000 छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना संभव नहीं है।
इंटर के नामांकन में अप्रत्याशित वृद्धि: प्राचार्य
प्राचार्य दयानंद कुमार ने कहा कि हाल के दिनों में इंटर में नामांकन में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इसमें लड़कियों की संख्या अधिक है। इंटर आर्ट्स की 12वीं में लगभग 1000 छात्र नामांकित हैं। 11वीं में नामांकन चल रहा है। अभी तक 850 के करीब नामांकन हुआ है। आर्ट्स में नियमित कक्षाएं चल सके इसके लिए फिलहाल 20 से 25 शिक्षकों की जरुरत है। शिक्षकों की कमी की समस्या से विभाग को समय समय पर अवगत कराया जाता है।
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