Gridih News: झामुमो जिलाध्यक्ष समेत 14 के खिलाफ एससी-एसटी थाना में शिकायत
Gridih News: गिरिडीह में जेपीएससी/जेएसएससी में गड़बड़ी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। छात्र संगठनों द्वारा पुतला फूंकने के बाद दोनों पक्षों के बीच कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। अभाविप के सह मंत्री मंटू मुर्मू ने झामुमो नेताओं के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एससी-एसटी थाना में आवेदन दिया है।

Gridih News: गिरिडीह, प्रतिनिधि। जेपीएससी/जेएसएससी में गड़बड़ी को लेकर गिरिडीह में मुख्यमंत्री का छात्र संगठनों द्वारा पुतला फूंकने को लेकर शुरू हुआ विवाद गिरिडीह में थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों पक्षों की ओर से इस मामले में थाना में मुकदमें किये जा रहे हैं।
छात्र संगठनों का विरोध
झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा खदेड़ने एवं पीटे जाने को लेकर जहां पूर्व में अभाविप एवं छात्र संगठन द्वारा झामुमो नेताओं एवं कार्यर्ताओं तथा झामुमो की ओर से अभाविप एवं छात्र संगठन के छात्रों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी जा चुकी है वहीं भाजपा नेताओं पर भी एक अन्य प्राथमिकी मुख्यमंत्री पुतला दहन को लेकर हुए विवाद को लेकर प्रशासन की ओर से दर्ज की गयी है। अब एक बार फिर अभाविप के प्रदेश सह मंत्री मंटू मुर्मू ने एससी-एसटी थाना में झामुमो जिलाध्यक्ष समेत अन्य के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है।
गंभीर आरोप और साजिश
आवेदन में लखन राम, मोहम्मद असलम, राजा अंसारी उर्फ खौरा, अजीत कुमार पप्पू, संजय सिंह, राकेश कुमार सिंह, सद्दाम आफताब, शाहनवाज अंसारी, दिलीप मंडल, पप्पू मन्नू चंद्रवंशी, सनी राइन, सुमित कुमार, मुकेश केसरी, अभय सिंह एवं अन्य लगभग 100 अज्ञात लोगों पर कई गंभीर आरोप है। कहा गया है कि यह घटना एक पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा है।
शायद एक योजनाबद्ध हमला
21 अगस्त 2026 की शाम लगभग 4:00 बजे मोहम्मद असलम अपने व्हाट्सएप ग्रुप से झामुमो के व्हाट्सएप ग्रुप पर एक संदेश भेजा था कि 4:00 बजे शाम झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यालय में आपात बैठक है। आप लोग पहुंचिए। उन लोगों ने एक सोची समझी साजिश के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यालय में बैठक की और उन लोगों की हत्या करने के उद्देश्य से सभी एकमत होकर झंडा मैदान पहुंचे और जानलेवा हमला किया। मोहम्मद असलम के ट्विटर पर लगभग 2000 फॉलोअर्स है और इस सूचना पर वहां लोग इकट्ठा हुए थे। यह एक गहरी साजिश है। जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है कि किसके आदेश पर मोहम्मद असलम ने वह सूचना अपने मोबाइल के जरिए जारी किया था। इसकी गहन जांच जरूरी है。


