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चेक बाउंस के मामले में दोषी को डेढ़ साल का कारावास

चेक बाउंस के मामले में दोषी को डेढ़ साल का कारावास

संक्षेप:

गिरिडीह में चेक बाउंस के मामले में चांद मोहम्मद नूर हुसैन को एक साल छह महीने की कारावास और मेसर्स लाल स्टील प्राइवेट लिमिटेड को 22 लाख 47 हजार 970 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। यह मामला एनआई एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत दर्ज किया गया था।

Dec 03, 2025 01:22 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गिरडीह
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गिरिडीह, प्रतिनिधि। चेक बाउंस के मामले में दोषी को एक साल छह माह कारावास का दंड दिया गया है। इसके अलावा नुकसान के लिए मुआवजा के तौर पर शिकायतकर्ता मेसर्स लाल स्टील प्राइवेट लिमिटेड को 22 लाख 47 हजार 970 रुपये देने का निर्देश दिया गया है। यह दंड न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी श्री प्रिया की अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के महालंदी स्थित एलआर ट्रेडर्स के प्रोपराईटर चांद मोहम्मद नूर हुसैन को दिया है। अदालत ने एनआई एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत चांद मोहम्मद नूर हुसैन को दंडित किया है। यह मामला साल 2022 का है।

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मोहम्मद नूर हुसैन द्वारा लाल स्टील से 19 लाख 5 हजार 60 रूये का छड़ खरीदा था। इस दौरान चांद द्वारा लाल स्टील को चेक दिया गया था। बाद में चांद द्वारा भुगतान नहीं करने व चेक बाउंस हो जाने के बाद लाल स्टील की ओर से नगर थाना क्षेत्र के पावर हाउस रोड निवासी विकास कुमार ठाकुर द्वारा कोर्ट में एनआईए एक्ट के तहत परिवाद दायर किया गया था। अदालत ने फैसले में क्या कहा: अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि इस मामले में आरोपी को उसके किए गए जुर्म के लिए दोषी पाया गया है और वह एनआई एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत सज़ा के लायक है। उसने शिकायत करने वाले के पक्ष में कर्ज़ या दूसरी देनदारी चुकाने के लिए चेक जारी करने का जुर्म किया, जबकि उसके अकाउंट में उस चेक को चुकाने के लिए काफ़ी पैसे नहीं थे। उसने डिमांड नोटिस के बाद भी शिकायत करने वाले को डिसऑनर हुए चेक का अमाउंट नहीं दिया। इस तरह, उसने अपने काम से शिकायत करने वाले को नुकसान भी पहुंचाया। इन सभी बातों और हालात को ध्यान में रखते हुए और यह देखते हुए कि यह उसका पहला जुर्म है और वह आदतन जुर्म करने वाला नहीं है। दोषी चांद मोहम्मद नूर हुसैन को उसके किए गए जुर्म के लिए एक साल और छह महीने की सिंपल जेल की सज़ा दी जाती है। उसे आगे आदेश दिया जाता है कि वह शिकायत करने वाले को सेक्शन 357(3) सीआरपीसी के तहत हुए नुकसान के लिए मुआवज़े के तौर पर 22 लाख 47 हजार 970 रूपये दे। मुआवज़े की रकम न देने पर तीन महीने की कारावास होगी। इसके अलावा आरोपी को जेल काटनी होगी और मुआवज़े की रकम 30 दिनों के अंदर जमा करनी होगी।