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गिरिडीह: पेटीएम ग्राहकों से धोखाधड़ी करनेवाले दो साइबर अपराधी गिरफ्तार

गिरिडीह: पेटीएम ग्राहकों से धोखाधड़ी करनेवाले दो साइबर अपराधी गिरफ्तार

साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगी एवं धोखाधड़ी करते दो साइबर अपराधियों को रंगेहाथ धर दबोचा है। साइबर थाना व गांडेय थाना पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में यह सफलता मिली है। गांडेय थाना क्षेत्र के रकसकुटो गांव से दोनों साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार साइबर अपराधियों में प्रदीप मंडल व प्रेमचंद मंडल शामिल है। साइबर डीएसपी संदीप सुमन समदर्शी ने रविवार को बरवाडीह पुलिस लाईन में पत्रकार सम्मेलन आहूत कर यह जानकारी दी।

साइबर डीएसपी ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि गाण्डेय के रकसकुट्टो के पूरब स्थित जमुनियाबाद बांसबाड़ी में दो साइबर अपराधी अपने मोबाइल फोन से पेटीएम एप्प के माध्यम से पेटीएम खाता धारकों को पीटीएम एकाउंट बंद होने के नाम पर गुमराह कर उनके साथ ठगी एवं धोखाधड़ी करने हेतु मोबाइल फोन से पेटीएम अधिकारी होने के नाम पर ठगी कर रहे हैं। इसी सूचना पर छापामारी की गयी। छापामारी के दौरान पुलिस के पहुंचने का भनक लगते ही साइबर अपराधी भागने लगे। पुलिस बल ने खदेड़कर प्रदीप व प्रेमचंद को पकड़ लिया। इन दोनों के पास से छह मोबाइल फोन व दो एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं।

रांची के बरियातु में रहकर करते थे साइबर क्राइम

साइबर डीएसपी ने बताया कि पिछले एक साल से दोनों अपराधी रांची के बरियातु में रहकर साइबर क्राइम को अंजाम देते थे। रांची पुलिस ने जब दबिश बढ़ाई तो दोनों वहां से भाग कर गिरिडीह आ गए। उन्होंने बताया कि प्रदीप मंडल जामताड़ा जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र के झिलुआ तथा प्रेमचंद मंडल गांडेय थाना क्षेत्र के रकसकुटो गांव का रहनेवाला है। उन्होंने बताया कि दोनों अपराधी ठगी करने के बाद पैसे से शॉपिंग भी करते थे। फिलहाल दोनों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इनके अन्य साथियों के नाम-पता मिले हैं। पुलिस अब इनके साथियों की तलाश में जुट गयी है। दोनों के बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है।

कैसे करते थे ठगी

पूछताछ में पकड़े गए साइबर अपराधियों ने पेटीएम के माध्यम से ठगी करने की पूरी प्रक्रिया का विवरण पुलिस को दिया। दोनों साइबर अपराधियों ने बताया कि अपने मोबाईल फोन में पेटीएम एप्प खोलते हैं। इसके बाद पे-वाले ऑप्शन में जाते हैं और मोबाईल नंबर डालने के स्थान पर अपने मन से कोई भी दस अंक का संभावित मोबाईल नंबर डालते हैं। यदि वह मोबाईल नंबर पेटीएम में रजिस्टर्ड नहीं होता है तो नॉट रजिस्टर्ड बताता है। यदि रजिस्टर्ड होता है तो नाम के साथ मोबाईल नंबर दर्शाता है। इसी मोबाईल नंबर पर इनके द्वारा कॉल कर बताया जाता है कि आपका पेटीएम ब्लॉक हो गया है जिसे पुन: चालू करने के लिए 01203888388 टॉल फ्री नंबर पर कॉल करने के लिए बोला जाता है। उसके बाद तीन बार एक (111) दबाने से पासवर्ड री-सेट करने हेतु लिंक कम्पनी द्वारा भेजा जाता है तथा उस लिंक को इन लोगों द्वारा अपने मोबाईल नम्बर पर मैसेज के माध्यम से मंगवा लिया जाता है। इस लिंक को ऑपेन करके इनके द्वारा आसानी से पासवर्ड को बदल दिया जाता है क्योंकि इसके लिए ओटीपी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। पासवर्ड बदलने के बाद इनके द्वारा जब पेटीएम में लॉगिन किया जाता है तो पुन: एक ओटीपी की आवश्यकता पड़ती है जो शिकार हुए ग्राहकों के मोबाईल फोन में जाता है। इनके द्वारा पुन: शिकार व्यक्ति से ओटीपी प्राप्त करके पेटीएम में लॉगिन करके उपलब्ध राशि को किसी दूसरे पेटीएम में अंतरित कर लिया जाता है। उसके बाद इनके द्वारा इसका उपयोग ऑन लाईन शॉपिंग एवं विभिन्न प्रकार का रिचार्ज करने में किया जाता है।

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  • Web Title:arrested two cyber criminals who fraud