हो-हंगामा के बीच चारों आरोपी अदालत में पेशी के बाद फिर भेजे गये जेल

हिन्दुस्तान, गिरडीह
Follow us on Google News
share

गिरिडीह, प्रतिनिधि। नगर निगम चुनाव के दौरान हुए चर्चित आजाद नगर गोलीकांड मामले में जेल से निकलते ही गिरफ्तार किये गये चारों आरोपियों को शुक्रवार को वि

हो-हंगामा के बीच चारों आरोपी अदालत में पेशी के बाद फिर भेजे गये जेल

गिरिडीह, प्रतिनिधि। नगर निगम चुनाव के दौरान हुए चर्चित आजाद नगर गोलीकांड मामले में जेल से निकलते ही गिरफ्तार किये गये चारों आरोपियों को शुक्रवार को विरोध व हो-हंगामा के बीच सीजेएम की अदालत में पचंबा पुलिस ने पेश किया जहां से चोरों को न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारा गिरिडीह भेज दिया गया। इस बार चारों आरोपियों को पुलिस ने पचंबा थाना कांड संख्या 15/26 में गिरफ्तार किया है। उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर निकले चार आरोपियों को पचंबा पुलिस ने इसी कांड से जुड़े एक दूसरे मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की इस कार्यशैली को जेल भेजे गये आरोपियों के परिजनों ने साजिश बताया है जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है।

जेल भेजे गये आरोपियों में अमित विश्वकर्मा, मनजीत पासवान, किशोर कुमार और आकाश हांडी है। शुक्रवार को सीजेएम की अदालत में पेशी के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय कुमार सिन्हा ने जोरदार बहस की। अधिवक्ता ने पचंबा पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अदालत को बताया कि जिन आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत मिली, उन्हें जेल से निकलते ही दूसरे केस में गिरफ्तार कर लिया गया। अधिवक्ता का कहना था कि यह पूरी कार्रवाई संदेह पैदा करती है और इससे पुलिस की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कांड के अनुसंधानकर्ता प्रशांत सिंह से जवाब तलब किया है। बता दें कि चारों पूर्व में मृतक पक्ष की शिकायत पर दर्ज पचंबा थाना कांड संख्या 16/26 में जेल में बंद थे। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद चोरों गुरूवार की देर शाम जेल से बाहर निकले थे। हालांकि जेल से बाहर निकलते ही पचंबा पुलिस ने चोरों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी बाद शुक्रवार को चारों आरोपियों को पचंबा पुलिस अदालत में पेशी के लिए लेकर कोर्ट पहुंची। इसकी भनक लगते ही भारी संख्या में आरोपियों के परिजन एवं मोहल्ले के लोग कोर्ट परिसर पहुंच गये और गिरफ्तारी का विरोध करने लगे। विरोध करने वालों में महिलाओं की संख्या काफी थी। परिजनों ने विरोध जताते हुए पुलिस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया। परिजनों का कहना था कि दोनों मामलों के अनुसंधानकर्ता एक ही अधिकारी प्रशांत सिंह हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि 104 दिन बीत जाने के बाद भी एक मामले में चार्जशीट क्यों दाखिल नहीं की गई जबकि दूसरे मामले में कार्रवाई आगे बढ़ा दी गई। परिजनों ने इसे पुलिस की मनमानी बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।