सरकारी नौकरी लग गई, फिर भी राशन कार्ड नहीं कराया बंद? अब पड़ सकता है भारी, जानें कैसे

हिन्दुस्तान, रांची
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सरकारी नौकरी लगने के बाद भी राशन कार्ड सरेंडर नहीं करने वालों पर रांची में कार्रवाई शुरू हो गई है। रेलवे कर्मचारी और सरकारी शिक्षिका समेत कई अपात्र लाभुकों को नोटिस जारी कर राशन की राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

How to Apply for New Ration Card Online in Delhi
How to Apply for New Ration Card Online in Delhi:

Ration Card Rules: अगर आपकी सरकारी नौकरी लग चुकी है और इसके बावजूद आपने अपना राशन कार्ड सरेंडर नहीं किया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। झारखंड की राजधानी रांची में जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत अपात्र राशन कार्डधारकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर वर्षों से लिए गए सरकारी खाद्यान्न की राशि वापस जमा करने का निर्देश दिया गया है। राशि जमा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

रांची जिला प्रशासन की जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार, वर्षों से सरकारी नौकरी कर रहे कुछ लोग भी गरीबों के लिए निर्धारित राशन योजना का लाभ उठाते रहे। इनमें एक रेलवे कर्मचारी शामिल है, जो पिछले नौ वर्षों से सरकारी सेवा में है, लेकिन इसके बावजूद अंत्योदय राशन कार्ड पर खाद्यान्न लेता रहा। नोटिस मिलने के बाद उसने दलील दी कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद राशन कार्ड सरेंडर करना होता है।

इसी तरह एक सरकारी शिक्षिका भी जांच के दायरे में आई हैं। वह पिछले 10 वर्षों से सरकारी सेवा में हैं, लेकिन नियमित रूप से सरकारी राशन लेती रहीं। उन्होंने भी प्रशासन के सामने यही सफाई दी कि नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण राशन कार्ड बंद नहीं कराया।

प्रशासन का कहना है कि आर्थिक स्थिति बदलने या सरकारी नौकरी मिलने के बाद राशन कार्ड सरेंडर करना लाभुक की जिम्मेदारी होती है। ऐसा नहीं करने पर वह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभ का पात्र नहीं रहता।

अपात्र लाभुकों की पहचान के लिए जिला प्रशासन ने केपीआई (Key Performance Indicator) आधारित सत्यापन कराया। इसमें केवल राशन कार्ड का सत्यापन नहीं किया गया, बल्कि भूमि स्वामित्व, आय, वाहन, जीएसटी और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जुड़े डाटा का भी मिलान किया गया। जांच में बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आए, जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद वर्षों से गरीबों के हिस्से का सरकारी अनाज ले रहे थे।

प्रशासन ने ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर सरकारी खाद्यान्न की कीमत जमा करने का निर्देश दिया है। कई मामलों में वसूली की राशि हजारों रुपये से लेकर तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या तय समय में राशि जमा नहीं करने पर वसूली के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी भी दर्ज की जा सकती है।

नोटिस मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग रांची समाहरणालय और जिला आपूर्ति कार्यालय पहुंच रहे हैं। कोई नियमों की जानकारी नहीं होने की बात कह रहा है तो कोई कार्रवाई से बचने के लिए अलग-अलग दलीलें दे रहा है। हालांकि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अपात्र लाभुकों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

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रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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