
पूजा होने तक गांव में कोई भी ग्रहण नहीं करता अन्न जल
ग्राम दुद्धीचक में सरस्वती की एकमात्र प्रतिमा की स्थापना के दौरान गांव के लोग अन्न ग्रहण नहीं करते। यह परंपरा वर्षों से चल रही है। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण कर सभी घर लौटते हैं। गांव के युवा इस पूजा में भाग लेने के लिए विशेष रूप से आते हैं, जो उनकी आस्था को दर्शाता है।
तस्वीर 08 में ग्राम दुद्धीचक में बिठाई जाती है सरस्वती की एकमात्र प्रतिमा मेहरमा, एक संवाददाता: प्रखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत कसबा के गांव दुधीचक में प्रतिमा स्थापित कर पूजा पाठ संपन्न होने तक गांव में कोई भी अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं करता। यह परिपाटी वर्षों से चली आ रही है। जिसका पालन गांव के बच्चे, बुजुर्ग, महिला एवं पुरुष सभी श्रद्धा पूर्वक करते हैं। पूजा के दौरान पूरा गांव वहां उपस्थित रहता है। पूरे विधि विधान से मां शारदे की पूजा के पश्चात प्रसाद ग्रहण कर ही ग्रामवासी अपने-अपने घरों की ओर लौटते हैं।ज्ञात हो कि इस गांव में केवल एक ही प्रतिमा बिठाई जाती है, और मां सरस्वती के प्रति अगाध आस्था के कारण बाहर निवास करने वाले नौकरी पेशा नवयुवक होली, दीपावली, दुर्गा पूजा एवं छठ की बजाय इस पूजा में सम्मिलित होने अवश्य आते हैं।
जो पूर्व नियोजित रहता है। हालांकि आस्था के प्रतिफल भी स्पष्ट दृष्टिगोचर होते हैं।प्रत्येक वर्ष अच्छी खासी संख्या में नवयुवक सरकारी नौकरी में योगदान देते हैं। इस पूजा की तैयारी काफी पहले से शुरू कर दी जाती है। आकर्षक पंडाल बनाकर मूर्ति स्थापित करने के अलावा रात्रि में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। आज पंडित सुधीर कुमार झा ने विधि विधान से मंत्रोच्चारण के साथ पूजा कराई। जिसमें यजमान के रूप में अमन मिश्रा बैठे थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के प्रणव झा, बंटी झा, शिवम मिश्रा, अंकित ठाकुर, शुभम झा, सत्यम ठाकुर, रोहित मिश्रा, रोहण मिश्रा, अनुपम ज्योति, अभिषेक झा, चंदन मिश्रा, रूपेश झा तथा अनंत ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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