
सड़क सुरक्षा माह अभियान पोस्टर बैनर तक सिमटा, नियमों की खुलेआम हो रही अनदेखी
गोड्डा में सड़क सुरक्षा माह अभियान केवल औपचारिकता तक सीमित है। पोस्टर और पंपलेट के बावजूद, सड़क पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है। दोपहिया चालक बिना हेलमेट और ओवरलोडिंग कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नियमित चेकिंग और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
गोड्डा। जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला परिवहन विभाग द्वारा चलाया जा रहा सड़क सुरक्षा माह अभियान कागजी और औपचारिकता तक ही सीमित नजर आ रहा है। अभियान के तहत शहर के प्रमुख चौक चौराहों, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्रों और स्कूलों के आसपास पोस्टर , बैनर तो लगाए गए हैं और पंपलेट बांटे गए है , लेकिन इनका असर सड़कों पर दिखाई नहीं दे रहा है। शहर की सड़कों पर रोजाना ऐसे नजारे देखने को मिलते हैं, जहां दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट फर्राटा भरते नजर आते हैं।
कई जगहों पर बाइक पर तीन तीन सवारियां बैठाकर चलना आम हो गया है। इससे चालक और सवारियों की जान जोखिम में पड़ रही है और राहगीरों के लिए भी खतरा बना हुआ है। विशेषकर सुबह स्कूल जाने के समय और शाम को बाजार बंद होने के दौरान ट्रिपल लोडिंग और तेज रफ्तार का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई केवल कभी कभार विशेष अभियान तक सीमित रह जाती है। जब तक चेकिंग अभियान चलता है, तब तक नियमों का पालन होता दिखता है, लेकिन जैसे ही अभियान समाप्त होता है, स्थिति फिर वही हो जाती है। कई व्यस्त चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती नहीं होने से वाहन चालकों में नियम तोड़ने का डर खत्म होता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो महीनों में परिवहन विभाग द्वारा करीब आठ लाख रुपये के चालान काटे गए हैं। इनमें अधिकांश मामले बिना हेलमेट, ओवरलोडिंग, ड्रिंक एंड ड्राइव , ट्रिपल लोडिंग और कागजात की कमी से जुड़े हैं। इसके बावजूद नियमों के पालन में सुधार नहीं होना यह दर्शाता है कि केवल जुर्माना वसूलना ही समस्या का समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि नियमों को सख्ती से लागू किया जाए और बार बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावी अभियान के लिए निरंतर निगरानी, नियमित चेकिंग और व्यापक जन जागरूकता बेहद जरूरी है। स्कूल कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम, वाहन चालकों के लिए प्रशिक्षण शिविर और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता रैलियों के माध्यम से लोगों को नियमों के महत्व को समझाया जाना चाहिए। इसके साथ ही ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई से ही अनुशासन कायम हो सकता है। वहीं आम लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क सुरक्षा अभियान को केवल पोस्टर बैनर और आंकड़ों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर उतारा जाए। शहर के हर प्रमुख चौक पर नियमित चेकिंग, सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी और ट्रैफिक पुलिस की सक्रिय मौजूदगी से ही नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सड़क दुर्घटनाओं में और बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जिला परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस के सामने यह बड़ी जिम्मेदारी है कि सड़क सुरक्षा अभियान को प्रभावी बनाकर लोगों की जान और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, ताकि सड़कों पर अनुशासन और सुरक्षित यातायात का माहौल बन सके।

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