
एसआरटी कॉलेज धमड़ी में अंतरराष्ट्रीय एआई संगोष्ठी आयोजित
मेहरमा में रघुनंदन तिवारी महाविद्यालय में एआई के उत्तरदायी विषय पर एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। प्रोफेसर राजेश कुमार ने एआई के विकास, सामाजिक प्रभाव और नैतिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऊर्जा खपत और पर्यावरणीय प्रभाव के बारे में चेतावनी दी, और नैतिक मूल्यों के साथ एआई के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
मेहरमा, एक संवाददाता। बुधवार को स्थानीय रघुनंदन तिवारी महाविद्यालय धमड़ी में एआई के उत्तरदाई विषय पर एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य तेजी से हो रहे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नवाचार और नैतिक व शासन संबंधी रूपरेखाओं को विकास के बीच की खाई को पाटना है। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के भौतिक विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रोफेसर राजेश कुमार ने एक विचारोत्तेजक और ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तीव्र विकास, उसके सामाजिक प्रभावों तथा उससे जुड़ी नैतिक और पर्यावरणीय चुनौतियों पर गहन प्रकाश डाला।प्रो. कुमार ने बताया कि आधुनिक एआई प्रणालियां बहुत ही कम समय में करोड़ों उपयोगकर्ताओं तक पहुंच चुकी हैं, जो मानव और प्रौद्योगिकी के संबंधों में एक संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत है।
उन्होंने एआई की ऊर्जा खपत और पर्यावरणीय प्रभाव पर विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए एक उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसमें एक एआई प्रयोग में इतनी अधिक बिजली की खपत हुई कि उससे हजारों भारतीय घरों को पूरे एक वर्ष तक ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकती थी। उन्होंने चेताया कि एआई डेटा केंद्रों की बढ़ती संख्या और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता जलवायु परिवर्तन को और गंभीर बना रही है।नैतिक पक्ष पर चर्चा करते हुए उन्होंने स्वचालित वाहनों जैसे क्षेत्रों में एआई द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों की जटिलताओं को रेखांकित किया तथा हाल ही में अमेरिका में एआई जनित गलत कानूनी संदर्भों के मामलों का उल्लेख करते हुए मानव उत्तरदायित्व की अनिवार्यता पर बल दिया।अपने व्याख्यान के अंत में उन्होंने कहा कि एआई का भविष्य तभी सुरक्षित और उपयोगी होगा, जब उसका विकास नैतिक मूल्यों, सतत ऊर्जा उपयोग और सुदृढ़ शासन व्यवस्था के साथ किया जाए। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर शंभू कुमार सिंह, प्रोफेसर निमाई चंद्र दास, महेश्वर इंदवार सहित अन्य उपस्थित थे।

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