15वें वित्त आयोग की राशि नहीं मिलने से गांवों की योजनाएं ठप, जनता परेशान
बसंतराय प्रखंड की पंचायतें गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। 15वें वित्त आयोग की राशि समय पर नहीं मिल रही है, जिससे विकास कार्य ठप हो गए हैं। मुखिया आलमगीर आलम ने बताया कि केंद्र और झारखंड सरकार की मदद नहीं मिलने से बुनियादी सुविधाएं कागजों में सीमित रह गई हैं। ग्रामीणों ने फंड की मांग की है।

बसंतराय प्रतिनिधि । बसंतराय प्रखंड की लगभग सभी पंचायतें इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। 15वां वित्त आयोग की राशि पंचायतों को समय पर नहीं मिलने के कारण गांवों में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। पंचायतों के खाते खाली पड़े हैं, जिससे बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। मुखिया संघ के उपाध्यक्ष एवं धपरा पंचायत के मुखिया आलमगीर आलम ने बताया कि केंद्र सरकार और झारखंड सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग की राशि गांव की सरकार कही जाने वाली पंचायतों के मुखिया फंड में नहीं भेजी जा रही है।
2024- 25, में एक किस्त दिया गया हैं। इसका सीधा असर गांवों के विकास पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा की पंचायत स्तर पर होने वाले अधिकांश छोटे लेकिन अत्यंत आवश्यक विकास कार्य जैसे पीसीसी सड़क निर्माण, नाली निर्माण और पेयजल के लिए जलमीनार निर्माण या तो शुरू ही नहीं हो पा रहे हैं, या बीच में ही अटके हुए हैं। इसके साथ ही अबुआ आवास प्रधानमंत्री आवास योजना की स्थिति भी चिंताजनक है। न तो बने हुए आवासों की राशि मिल रही है और न ही नए आवासों की स्वीकृति हो पा रही हैं। वहीं मैया सम्मान योजना में जिन लाभार्थियों की त्रुटियां सुधार दी गई हैं, उनके बावजूद पोर्टल नहीं खुलने से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे महिलाओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। विकास कार्यों के लिए राशि नहीं होने से मजदूरों को भी रोजगार नहीं मिल पा रहा है। काम ठप रहने के कारण ग्रामीणों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है और पूरे प्रखंड में विकास की रफ्तार बेहद धीमी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर की योजनाएं ही गांवों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करती हैं। सड़कों की बदहाल स्थिति से आवागमन में कठिनाई हो रही है, नालियों का निर्माण नहीं होने से जलजमाव और गंदगी बढ़ रही है, वहीं कई गांवों में आज भी शुद्ध पेयजल के लिए जलमीनार की सख्त जरूरत बनी हुई हैं। लेकिन पंचायतों के पास फंड नहीं होने से सभी योजनाएं ठप पड़ी हैं। समय पर राशि नहीं मिलने से विकास कार्यों की जवाबदेही भी प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं, लेकिन मुखिया और पंचायत प्रतिनिधि खुद को असहाय और बेबस महसूस कर रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि 15वें वित्त आयोग की लंबित राशि अविलंब पंचायतों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि बसंतराय प्रखंड के गांवों में रुका हुआ विकास कार्य फिर से शुरू हो सके और ग्रामीणों को सड़क, नाली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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