
जिले में पुनर्जीवित खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है: डीडीसी जिले में पुनर्जीवित खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है: डीडीसी
घाघरा में मंगलवार को पुनर्जीवित खेती और स्वदेशी बीज संरक्षण पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ डीडीसी दिलेश्वर महतो और सीओ खाखा सुशील कुमार ने किया। किसानों ने स्वदेशी बीजों की प्रदर्शनी लगाई। डीडीसी महतो ने हाइब्रिड बीजों के दुष्प्रभावों पर चिंता जताई और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
घाघरा, प्रतिनिधि। प्रखंड कार्यालय परिसर में मंगलवार को पुनर्जीवित खेती और स्वदेशी बीज संरक्षण विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रदान द्वारा संचालित घाघरा वूमेन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से आयोजित हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डीडीसी दिलेश्वर महतो और सीओ खाखा सुशील कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मौके पर प्रखंड क्षेत्र के किसानों ने विभिन्न स्वदेशी बीजों की प्रदर्शनी लगाई। जिसने किसानों के पारंपरिक ज्ञान और जैव विविधता का परिचय दिया। डीडीसी महतो ने हाइब्रिड बीजों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी, उत्पादन और लागत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को गंभीर बताया।

उन्होंने कहा कि जिले में पुनर्जीवित खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है और संस्था द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। सीओ सुशील कुमार ने प्राकृतिक खेती के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से महिला किसानों को जोड़कर उन्हें अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। प्रदान रांची के जीब दास ने कहा कि कंपनियों पर बढ़ती निर्भरता के कारण किसानों का अपने पारंपरिक बीजों पर नियंत्रण कम हुआ है। ऐसे में एफपीओ स्तर पर बीज बैंक स्थापित कर स्वदेशी बीजों का संरक्षण महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि झारखंड मिलेट मिशन इस दिशा में सहायक सिद्ध होगा। मौके पर प्रदान गुमला के जितेंद्र यादव, जिला उद्यान पदाधिकारी तमन्ना परवीन , कृषि पदाधिकारी शुभम प्रिया,घाघरा प्रमुख सबिता देवी सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी,विशेषज्ञ और किसान बड़ी संख्या में मौजूद थे।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




