केवीके गुमला में लातेहार के किसानों को मिली मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग
गुमला में कृषि विज्ञान केंद्र ने विकास भारती के सहयोग से मधुमक्खी पालन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। 60 किसानों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य उनकी आय बढ़ाना और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना था। विशेषज्ञों ने मधुमक्खी पालन के महत्व और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

गुमला संवाददाता कृषि विज्ञान केंद्र गुमला द्वारा विकास भारती के सहयोग से वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में लातेहार जिले के 60 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए उनकी आय में वृद्धि और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना था। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने मधुमक्खी पालन के महत्व,संभावनाओं और वैज्ञानिक तरीकों पर जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक अटल बिहारी तिवारी ने कहा कि मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उभरता व्यवसाय है। जिससे शहद,मधुमोम और अन्य उत्पादों के जरिए किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।उन्होंने
कहा कि मधुमक्खियां फसलों के परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जिससे उत्पादन और गुणवत्ता में 20 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। प्रशिक्षण में मधुमक्खियों की प्रजातियों की पहचान,कॉलोनी प्रबंधन, रानी मधुमक्खी का महत्व,शहद निष्कर्षण की विधि और रोग नियंत्रण की जानकारी दी गई। वहीं विकास भारती के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत ने इसे ग्रामीण रोजगार का सशक्त माध्यम बताते हुए किसानों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में व्यावहारिक सत्र भी आयोजित किए गए। जिसमें प्रतिभागियों को कॉलोनी निरीक्षण और शहद निष्कर्षण का प्रशिक्षण दिया गया। समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
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